
मंडला। शहर का प्रतिष्ठित नेहरू पार्क, जो कभी हरियाली, शांति और सुंदरता की मिसाल हुआ करता था, आज प्रशासनिक लापरवाही की एक जीती-जागती तस्वीर बन गया है। नाम सुनते ही जहां मन में छा जाती है हरियाली की ताजगी, चिड़ियों की चहचहाहट और सुबह-शाम टहलने का सुकून, वहीं जब हकीकत में पार्क पहुंचते हैं तो स्वागत करता है दरवाजे पर फैला कूड़े का अंबार और बदबूदार गंदगी का नजारा । टूटे झूले, जंग खाई मशीनें, और जहरीली झाड़ियां पार्क के भीतर कदम रखते ही दिखता है कि हर तरफ जहरीली कांटेदार झाड़ियां फैल चुकी हैं। एक्यूप्रेशर टाइल्स काई से फिसलन भरी हो चुकी हैं। पुराने टायरों में जमा गंदा पानी मच्छरों का घर बन चुका है। वहीं प्रशासन की ओर से लगाया गया “ऐरा जिम” भी अब कबाड़ बन चुका है टूटी-फूटी मशीनें थक हारकर जंग खा रही हैं, जिन्हें देख कोई भी नागरिक व्यायाम करने से पहले ही पछता जाए । सवाल पार्क में घूमने आए कुछ लोगों ने बताया कि नगर पालिका ने पार्क के रखरखाव का ठेका निजी ठेकेदार को दे दिया है, जो सफाई और रखरखाव की व्यवस्था करने के बजाय केवल उगाही में जुटा हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बाद भी नगर पालिका के अधिकारी और प्रशासनिक अमला बेखबर बना हुआ है । हम यहां स्वास्थ्य लाभ के लिए आते थे, लेकिन अब पार्क में कबाड़ मशीनें, जहां-तहां गंदगी और कूड़ा ही नजर आता है। अब तो पार्क में घूमना भी सेहत के लिए खतरा बन गया है। जिले का मुखिया यदि इस ओर ध्यान दें, तो शायद सुधार की उम्मीद जाग सकती है।”
यदि कलेक्टर साहब कभी औचक निरीक्षण करें तो उन्हें पता चलेगा कि पार्क में फिटनेस मशीनें कब का दम तोड़ चुकी हैं। गंदगी और बदबू का आलम इतना बढ़ गया है कि यहां पर आना मुश्किल हो गया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।”प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल नेहरू पार्क की दुर्दशा न केवल नगर पालिका की निगरानी की कमी को उजागर करती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि नगर प्रशासन जनता की मूल सुविधाओं के प्रति इतना उदासीन क्यों है ?
एक ओर नगर पालिका शहर की सुंदरता बढ़ाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर शहर का प्रमुख पार्क ही उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार बना हुआ नगरवासी अब अपनी आंखों से इस लापरवाही का सच देख रहे हैं। जहां बच्चों के खेलने की जगह होनी चाहिए, वहां गंदगी का ढेर है। जहां सुबह की ताजगी मिलनी चाहिए, वहां बदबूदार हवा बह रही है। फोटो साफ बयान करती हैं पार्क की बदहाली का दर्द, जो प्रशासन की नींद तोड़ने के लिए काफी हैं ।
