शिवपुरी: शिवपुरी जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में स्वीपर ने काम करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ बीएल यादव को खुद दो शवों का पोस्टमार्टम करना पड़ा। स्वीपर ने काम करने की जो वजह बताई, वह हैरान करने वाली है। साथ ही कई सवाल खड़े करती है। दअरसल, स्वीपर को छह महीने से वेतन नहीं मिला है। पीएम हाउस पर पदस्थ स्वीपर नरेश वाल्मिकी का कहना है कि उसे छह साल से किए गए पोस्टमार्टम का पैसा नहीं मिला।
इतना ही नहीं पिछले छह महीने से वेतन भी नहीं मिला। नरेश का आरोप है कि सारा कठिन काम वही करता है जबकि डॉक्टर केवल ‘खड़े रहते हैं।’ नरेश ने बताया कि उसके सामने परिवार को पालने का संकट है। वह जब सिविल सर्जन से वेतन की मांग करता है तो पहले तो वह टाल देते थे, लेकिन अब उन्होंने वेतन देने से साफ मना कर दिया है। यही कारण है कि वह पीएम नहीं कर रहा है। नरेश वाल्मिकी का कहना है कि यह शवों को चीरता है, पैक करता है। फिर विसरा सुरक्षित रखता है। इसके बाद शव की सिलाई कर उसे पैक करता है। डाक्टर तो सिर्फ खड़े रहते हैं।
वहीं, सिविल सर्जन का कहना है कि पीएम तो डाक्टर ही करते हैं। नरेश तो सिर्फ बॉडी को रखने, पलटने और पीएम के बाद पैक करने का काम करता था। अब हम उसकी जगह यह काम किसी और से करवा लेंगे। रही बात उसके वेतन की तो वह मजदूरी वाला फंड आने पर उसे दे दिया जाएगा। पीएम का उसका कोई पैसा नहीं है। यह पैसा तो डाक्टरों के पास ही आता है। उसे मिला है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। इसके अलावा उसकी शराब पीने, पैसा मांगने आदि की शिकायतें भी लगातार बढ़ती जा रही थीं। ऐसे में उसे हटाने के संबंध में विचार करना पड़ा है।
