उज्जैन: संस्कृत के महान कवि और नाटककार महाकवि कालिदास को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद साहित्य जगत में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. इस विषय पर कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. गोविंद गन्धे ने स्पष्ट कहा है कि कालिदास मूर्ख नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य के अमर प्रतीक हैं.
नवभारत से चर्चा में डॉ. गन्धे ने बताया कि कालिदास के संबंध में मूर्ख कहे जाने की कोई ऐतिहासिक या प्रमाणिक जानकारी कहीं भी उपलब्ध नहीं है. न तो किसी ग्रंथ में, न किसी प्राचीन संदर्भ में इस तरह का उल्लेख मिलता है. उन्होंने कहा कि कालिदास को मूर्ख बताना न केवल असत्य है बल्कि भारतीय साहित्य की गरिमा पर आघात है.
कालिदास समारोह में रखेंगे विषय
अकादमी निदेशक ने कहा कि कालिदास संस्कृत अकादमी इस तरह की गलत धारणाओं को पूरी तरह खारिज करती है. उन्होंने बताया कि आने वाले कालिदास समारोह में भी इस विषय को प्रमुखता से रखा जाएगा ताकि जनमानस के बीच सच्चाई पहुंचे.
मेघदूत अभिज्ञान शाकुंतलम् और रघुवंशम
कालिदास न केवल कवि और नाटककार थे, बल्कि भारतीय ज्ञान, दर्शन और प्रकृति-संवेदना के सर्वश्रेष्ठ व्याख्याकारों में से एक थे. उन्होंने मेघदूत, अभिज्ञान शाकुंतलम्, रघुवंशम से ग्रंथों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को अमर कर दिया. उनकी रचनाएं आज भी साहित्य की दिशा तय करती है.
कला साहित्य संस्कृति विरोधी
अकादमी निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि कालिदास के नाम पर की गई गलत टिप्पणियां अति निंदनीय हैं और साहित्यकारों में इस विषय को लेकर लगातार विरोध और चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि कालिदास को मूर्ख बताने की अवधारणा शायद उन्हीं लोगों ने दी थी जो उस समय कला, भाषा और संस्कृति के महत्व को समझने में असमर्थ थे.
राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री को करेंगे आमंत्रित
67 वां अखिल भारतीय कालिदास समारोह 1 से 7 नवंबर तक आयोजित होगा. इस तारतम्य में कालिदास संस्कृत अकादमी में स्थानीय समिति की बैठक राज्य मंत्री संस्कृति पर्यटन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व धर्मेंद्र भावसिंह लोधी की अध्यक्षता में हो चुकी है. पं. सूर्यनारायण व्यास स्मृति व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे. सारस्वत कार्यक्रम, परिचर्चा, राष्ट्रीय संगोष्ठी, कालिदास व्याख्यान, संस्कृत कवि समवाय आयोजित किए जाएंगे.
1 नवंबर को होगा उद्घाटन
अखिल भारतीय कालिदास समारोह उद्घाटन के दो दिन पहले ही अनौपचारिक तौर पर शुरू हो जाएगा. कालिदास संस्कृत अकादमी द्वारा 30 अक्टूबर को वागर्चन विधि अंतर्गत महाकवि कालिदास की आराध्य देवी गढ़कालिका का पूजन, 31 अक्टूबर को कलश यात्रा एवं नान्दी (भक्ति संगीत की प्रस्तुति), प्रथम दिवस 1 नवम्बर को समारोह उद्घाटनविधि कालिदास अलंकरण एवं श्रेष्ठकृति पुरस्कार प्रदान संस्कृत नाटक होगा. ऐसे 7 दिन तक अलग-अलग कार्यक्रम होंगे
