जहरीले सिरप की गूंज अब बैतूल तक, दो मासूमों की संदिग्ध मौत से हड़कंप

बैतूल।छिंदवाड़ा और राजस्थान में खांसी के सिरप पीने से बच्चों की मौत के बाद अब बैतूल जिले के आमला में भी कोल्ड्रिफ कफ सिरप से दो बच्चों की मौत की आशंकाएं जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बताया जा रहा है कि बच्चे का उपचार छिन्दवाड़ा जिले के परासिया में किया गया था। परिजनों के अनुसार, 24 अगस्त को आमला विकासखंड के कलमेश्वरा के कबीर पिता कमलेश (4) को बुखार आने पर परासिया के डॉक्टर प्रवीण सोनी को दिखाया गया। इलाज के बाद उसे घर ले जाया गया, लेकिन जब हालत में सुधार नहीं हुआ, तो परासिया के दो अन्य डॉक्टरों से भी सलाह ली गई। इसके बाद परिजन उसे नागपुर ले गए, जहां एक दिन अस्पताल में भर्ती रखने के बाद डॉक्टर ने घर ले जाने की सलाह दी। परिजन संतुष्ट नहीं थे, इसलिए वे उसे सीधे भोपाल ले गए। वहां पहुंचते ही रात करीब साढ़े चार बजे कबीर की मौत हो गई। दूसरी घटना लादी ग्राम की है। यहां ढाई साल के गर्मित पिता निखिलेश की तबीयत बिगडऩे पर उसका इलाज कराया जा रहा था, लेकिन एक अक्टूबर को गांव में ही उसकी मौत हो गई।

कलेक्टर ने कहा- दोनों बच्चों का इलाज बैतूल में नहीं हुआ, जिले में कोल्ड्रिफ सिरप का विक्रय नहीं: आमला विकासखंड में निवासरत दो बच्चों की मृत्यु कोल्ड्रिफ सिरप से होने की खबरें प्रसारित की जा रही हैं। इस संबंध में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि दोनों बच्चों का इलाज बैतूल जिले के किसी भी शासकीय या निजी अस्पताल में नहीं हुआ है और जिले में कोल्ड्रिफ सिरप का विक्रय भी नहीं पाया गया है। कलेक्टर श्री सूर्यवंशी ने बताया कि ग्राम कलमेश्वरा निवासी बालक कबीर (4 वर्ष) पिता कैलाश और ग्राम जामुन बिछुआ निवासी गर्भित (ढाई वर्ष) पिता निखिलेश का इलाज बैतूल जिले में नहीं हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालक कबीर की मृत्यु अन्य जिले में, जबकि गर्भित की मृत्यु छिंदवाड़ा जिले के परासिया में इलाज के बाद उसके रिश्तेदार के घर ग्राम लादी (विकासखंड आमला) में हुई है। दोनों बच्चों की मृत्यु 8 सितंबर और 1 अक्टूबर 2025 को हुई थी। उन्होंने बताया कि अब तक जिले के स्वास्थ्य विभाग, पुलिस या प्रशासन को कोल्ड्रिफ सिरप से किसी की मृत्यु की कोई सूचना या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। कलेक्टर सूर्यवंशी ने कहा कि मेडिकल टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि बैतूल जिले में कोल्ड्रिफ सिरप का विक्रय नहीं हो रहा है और न ही मेडिकल स्टोर में यह सिरप उपलब्ध हैं। मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चों का प्राथमिक उपचार परासिया (जिला छिंदवाड़ा) के डॉ. प्रवीण सोनी द्वारा किया गया था। बच्चों की मृत्यु का अब तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है और अभिभावकों ने भी प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी है। कलेक्टर ने यह भी बताया कि आमला क्षेत्र के ग्राम छिंदवाड़ा जिले के परासिया के समीप स्थित हैं, जिसके कारण वहां के लोग उपचार के लिए परासिया का रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला बैतूल जिले से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं है।

विभाग ने जारी की एडवाइजरी

छिंदवाड़ा और राजस्थान में खांसी के सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामलों के सामने आने के बाद बैतूल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाडे ने जिले के सभी निजी मेडिकल स्टोरों और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को सतर्कता के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित सभी मेडिकल स्टोर यह सुनिश्चित करें कि वे केवल पंजीकृत चिकित्सक द्वारा निर्धारित की गई औषधि और सिरप ही नागरिकों को प्रदान करें। बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी प्रकार की औषधि या सिरप की बिक्री नहीं की जाए। औषधि निरीक्षक खाद्य एवं औषधि प्रशासन को आदेश दिए कि वे अपने स्तर पर औषधि वितरण की प्रक्रिया की निगरानी करें और किसी भी स्थिति में अप्रमाणित या संदिग्ध गुणवत्ता की दवा न बेचें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अपील की है कि नागरिक भी सावधानी बरतें और किसी भी दवा या सिरप का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।

इनका कहना है –

आमला विकासखंड के दो बच्चों का इलाज छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एक निजी चिकित्सक द्वारा किया गया था। दोनों बच्चों की मौत के पीछे खांसी सिरप का सेवन होने की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मैंने चार सदस्यीय जांच दल बनाकर भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की मौत कैसे हुई।

– मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ, बैतूल

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