अधिक समावेशी समाज बनाने के लिए वृद्धजनों की भागीदारी जरूरी : संयुक्त राष्ट्र

न्यूयार्क, 02 अक्टूबर (वार्ता) अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस प्रत्येक वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि पिछले तीन दशकों में 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु के लोगों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 1.2 अरब हो गई है और 2050 तक इसके 2.1 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की प्रमुख आयोजकों में से एक अर्जनिता एलेजाज ने कहा, “प्रत्येक वृद्ध व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और अपने जीवन को समृद्ध बनाने वाले अवसरों तक पहुंचने का अधिकार है।”
सुश्री अर्जनिता एलेजाज ने कहा, “ये विशेषाधिकार नहीं बल्कि मानवाधिकार हैं।” इस बैठक में स्वास्थ्य सेवा और आवास के साथ-साथ नागरिक और सांस्कृतिक जीवन में वृद्धजनों की भागीदारी बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। इस वर्ष इस बात पर जोर दिया गया कि वृद्धजनों को स्थानीय और वैश्विक कार्रवाई को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का अधिकार दिया जाना चाहिए, जिसका उद्देश्य नीति निर्माण में उनकी आवाज को बुलंद करना और अधिक समावेशी समाजों के निर्माण का प्रयास करना है।
उन्होंने कहा, “वृद्धजन अपने साथ जीवनभर के अनुभव, रहवास और सेवा का अनुभव लेकर चलते हैं। वे समुदायों, आंदोलनों और संस्थानों के निर्माता हैं जो आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। फिर भी अक्सर उनकी आवाज अनसुनी रह जाती है।” इस वर्ष ‘दुनिया बूढ़ी होती जा रही है’ विषयक कार्यक्रम के जरिए जारी एक वक्तव्य के अनुसार पिछले तीन दशकों में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 1.2 अरब हो गई है और 2050 तक इसके 2.1 अरब तक पहुंचने का अनुमान है।
वैश्विक जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के साथ 2030 के दशक के मध्य तक 80 वर्ष और उससे अधिक की आयु के लोगों की संख्या शिशुओं की संख्या से भी अधिक हो जाने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने संदेश में कहा, “हमें दूरदर्शिता और कार्रवाई के साथ इसका समाधान करना होगा। इसका मतलब है कि वृद्धजनों के अधिकारों का पूरा सम्मान हो, उनकी गरिमा बरकरार रहे और उनके योगदान को मान्यता मिले।” कोलंबिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और डीन एमेरिटा जीनेट ताकामुरा ने मुस्कुराते हुए और एक किस्से के साथ श्रोताओं को याद दिलाया कि उम्र बढ़ना एक सार्वभौमिक घटना है- “जब मैंने पिछली बार इस मंच पर भाषण दिया था, तब मेरे बाल गहरे भूरे थे और मैं एक इंच लंबी थी।
अब 26 साल बाद मैं एक इंच छोटी हूं और मेरे बाल सफेद हो गए हैं।” उन्होंने “अनेक-पीढ़ी के बीच पहुंच और समावेशन को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता” पर बल देते हुए कहा कि सामाजिक आंदोलन तब सबसे अधिक प्रभावशाली होते हैं जब वे एक व्यापक दायरे तक पहुंचते हैं और युवा और वृद्ध पीढ़ियों के लिए एक-दूसरे से और एक-दूसरे के बारे में सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।
उन्होंने एक सामाजिक आंदोलन की नींव की सराहना करते हुए कहा, “पिछले सभी अंतरराष्ट्रीय वर्षों में जो कुछ हुआ है वे आगे के आंदोलनों के लिए एक नींव ही हैं। आइए हम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करें। सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें और अपने विचारों का प्रसार करके उन युवा लोगों की विविध पीढ़ियों का स्वागत करें जिनकी हमें साझेदारों और सह-निर्माताओं के रूप में आवश्यकता है।”

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