मनरेगा मजदूरी में लापरवाही: मिस्त्री को एक साल बाद भी नहीं मिला मेहनताना, शिकायत पहुंची कलेक्टर जबलपुर तक

मझौली जबलपुर (म.प्र.), मझौली ब्लॉक।जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिछी में मनरेगा के तहत कराए गए निर्माण कार्यों की मजदूरी का भुगतान न होने से परेशान एक राजमिस्त्री वीरेंद्र बर्मन ने अब कलेक्टर कार्यालय जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत को कलेक्टर कार्यालय द्वारा दिनांक 05/08/2025 को जनसुनवाई रजिस्टर बुक क्रमांक 193, पावती क्रमांक 210/08 कंप्यूटर कोड 560005/210/08 के अंतर्गत स्वीकार किया गया है।

वीरेंद्र बर्मन, जो ग्राम बिछी, तहसील मझौली के निवासी हैं, ने बताया कि पंचायत सचिव रघुवीर दुबे के मौखिक निर्देश पर उन्होंने पंचायत क्षेत्र में नाली एवं पुलिया निर्माण का कार्य मजदूरों सहित पूर्ण कराया था। इसके लिए कुल ₹64,000/- की राशि तय हुई थी, जिसमें से मात्र ₹20,000/- की नगद राशि दी गई, और शेष ₹44,000/- मनरेगा मजदूरी मद से भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था।

पीड़ित का आरोप है कि कार्य पूर्ण हुए एक वर्ष बीत चुका है, परंतु अब तक शेष राशि नहीं मिली है। जब उन्होंने बार-बार पंचायत सचिव से संपर्क किया तो उन्हें न केवल अनदेखा किया गया, बल्कि धमकाया भी गया।

05 अगस्त 2025 को वीरेंद्र ने जबलपुर कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत किया जिसे विधिवत रूप से स्वीकार कर प्रथम पावती दी गई है। पावती में यह उल्लेख है कि यदि 30 दिनों के भीतर निराकरण नहीं होता, तो वे अगली जनसुनवाई में “आवेदन की समीक्षा” हेतु उपस्थित हो सकते हैं।

यह मामला न केवल ग्राम पंचायत स्तर पर मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी को उजागर करता है, बल्कि मजदूरों के साथ हो रहे शोषण और देरी को भी सामने लाता है। जनपद और जिला प्रशासन की निष्क्रियता ऐसे मामलों में और अधिक चिंता का विषय बनती जा रही है। ₹64,000/- में से ₹44,000/- का भुगतान एक वर्ष से लंबित

पीड़ित को धमकाने का आरोप पंचायत सचिव पर

दिनांक 05/08/2025 को कलेक्टर कार्यालय में आवेदन स्वीकार

पावती क्रमांक: 210/08, कंप्यूटर कोड: 560005/210/08

यदि 30 दिन में निराकरण नहीं हुआ, तो समीक्षा हेतु पुनः जनसुनवाई में उपस्थित रह सकते हैं

वीरेंद्र बर्मन ने मांग की है कि उन्हें उनका मेहनताना तुरंत दिया जाए तथा संबंधित अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो। साथ ही प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में मजदूरों का इस प्रकार शोषण न हो।

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