भोपाल। प्रातः प्रवचन सभा में मुनि श्री प्रमाण सागर ने कहा कि भारतीय परंपरा में पत्नी के अलावा अन्य स्त्री को मां-बहन और परपुरुष को पिता-भाई माना गया है, किंतु आज उन्मुक्त योनाचार की खुली बकालत व्याभिचार को बढ़ावा दे रही है, जो मर्यादाओं के पतन का कारण है। उन्होंने कहा कि परचिंता, परनिंदा, परनारी और परधन से व्यक्ति का अधोपतन होता है। दूसरों की निंदा करने वाला स्वयं निंदनीय बन जाता है। मुनि श्री ने धर्माचरण में आत्मचिंतन, दोषों की गरहा और गुणग्रहण पर जोर दिया। उन्होंने परधन को नमकहरामी बताया और ईमानदारी का उदाहरण देते हुए एक आटो चालक की घटना सुनाई जिसने खोई हुई चैन लौटाई। प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सोमवार को मुनि श्री का मौन रहेगा और सभी कार्यक्रम निरस्त रहेंगे।
उन्मुक्त योनाचार की बकालत ने बढ़ाया व्याभिचार
