पिता जेल में, मां भूमिगत हुई, हम दोनों भाई मामा के यहां रहे

शाजापुर:आपातकाल के दौरान हमने काफी परेशानी झेली, मेरा छोटा भाई सुनील और मैं उस समय काफी छोटे थे. आपातकाल लगा तो मेरे पिता स्व. कृष्णदास गुप्ता पिता को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया वहीं मेरी मां को भी अंडरग्राउंड रहना पड़ा. हम दोनों भाई अपने मामा के यहां पर रहे.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना आज ही के दिन 27 सितंबर 1925 को हुई थी, आज संघ को पूरे सौ साल हो जाएंगे. इसी तारतम्य में नवभारत द्वारा संघ, संघ से जुडे स्वयंसेवकों एवं उनके परिजनों से चर्चाकर भूली बिसरी यादों को ताजा किया जा रहा है. नवभारत द्वारा चलाई जा रही मुहिम पुराने चेहरों से रूबरू कराने की कड़ी में स्वयंसेवक संघ, जनसंघ से जुडे स्वं. कृष्णदास गुप्ता के जीवन व चरित्र के बारे में उनके पुत्र अनिल गुप्ता से जानकारी लेकर साझा की जा रही है.
चीलर डैम फोडऩे का लगा आरोप, जेल भेज दिया
सब्जी मोहल्ला निवासी स्व. कृष्णदास गुप्ता का जन्म 28 अक्टूबर 1933 को हुआ था. 15-16 वर्ष की उम्र रही होगी जब वे संघ से जुडे. उनके बेटे अनिल गुप्ता बताते हैं कि मेरे पिता शिव मंदिर संघ की शाखा में जाते थे. शहर में निकलने वाले पथ संचलन में ध्वज लेकर चलते थे. वे कई आंदोलनों में शामिल रहे. आपातकाल के पहले वे जनसंघ के एक आंदोलन के दौरान भोपाल में ज्ञापन सौंपे जाते समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शंकरदयाल शर्मा के साथ धक्का मुक्की के आरोप में उन्हें आठ दिन जबलपुर जेल मेें रहना पड़ा. इसके बाद अन्य आंदोलन में ग्वालियर, राजगढ़ जेल में भी रहे. वहीं जून 1975 को आपातकाल लग गया. पिता सक्रिय कार्यकर्ता थे, उन्हें पुलिस पहले ही दिन गिरफ्तार करके उज्जैन भैरवगढ़ जेल लेकर चली गई. उन पर बेबुनियाद आरोप लगाया गया कि उन्होंने चीलर डैम को नुकसान पहुंचाया है. वे 19 माह 7 दिन जेल में बंद रहे.
कंस के सेनापति बनकर भी रंग जमाया
अनिल गुप्ता बताते हैं कि पिता स्वं. कृष्णदास गुप्ता सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, राष्ट्र धर्म आदि के कार्यक्रमों में बढ़ चढक़र हिस्सा लेते थे. शाजापुर में होने वाले ऐतिहासिक आयोजन कंस वधोत्सव कार्यक्रम में हमारे घर का भी योगदान हैं, दरअसल, मेरे पिता स्वं. गुप्ता 1977 से कंस के सेनापति बनते आए. इसके बाद उनका 25 दिसंबर 1992 को उनका निधन हो गया. जब से मैं कंस का सेनापति बनने लगा. वर्ष 2018 तक मैंने भी शाजापुर के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

ओटला बनाने का नाप देने के लिए खुद शमशान में लेट गए थे गुप्ता
अनिल गुप्ता बताते हैं कि शाजापुर के शमशान घाट में अंतिम संस्कार जमीन पर किया जाता था, इसके बाद ओटला बनाकर उस पर अंतिम संस्कार का कार्य किए जाने का निर्णय लिया गया. सभी जन शमशान पहुंचे, लेकिन ओटले के लिए नाप कितना लें इसे लेकर असंमजस की स्थिति बनी तो स्वयंसेवक रहे स्वं. कृष्णदास गुप्ता शमशान घाट में जहां चिता जलाई जाती है वहां खुद लेट गए और बोले कि मेरी हाइट के माप से नाप ले लो, क्योंकि मेरी हाइट 6 फीट 4 इंच है. इतनी हाइट शायद ही किसी की होती है, एक ही माप का ओटला बनने से दिवगंत लोगों के अंतिम संस्कार का कार्य बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए कृष्णदास गुप्ता की इस भावना की सभी ने सराहना की और यह वाकया चर्चा का विषय बन गया था. संघ से जुडे स्वयं सेवकों के आमजनों के प्रति प्रेम, सेवा व समर्पण के भाव का कोई सानी नहीं है.

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