
भोपाल: अजाक्स संगठन में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की हालिया नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
अजाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव (गृह) जे.एन. कंसोटिया ने हाल ही में तीन अधिकारियों को पदाधिकारी नियुक्त किया है। इनमें विशेष गढ़पाले, आईएएस (सचिव, ऊर्जा विभाग) को कार्यकारी अध्यक्ष, बी.एस. जामोद, आईएएस (आयुक्त, रीवा संभाग) और संतोष वर्मा, आईएएस (उपसचिव, कृषि) को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
संगठन के उपविधियों में ऐसे प्रावधान संभवतः मौजूद हों, लेकिन यह आशंका जताई जा रही है कि वरिष्ठ अधिकारियों के दोहरे दायित्व उनकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा कर सकते हैं। आलोचकों का मानना है कि अजाक्स मूल रूप से छोटे कर्मचारियों का संगठन है, और नेतृत्व इन्हीं से उभरना चाहिए। आईएएस अधिकारियों के शीर्ष पदों पर बैठने से जमीनी स्तर के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है।
राज्य शासन से बातचीत के दौरान भी असंतुलन की स्थिति बनती है, क्योंकि अन्य संगठन छोटे पदधारी कर्मचारियों द्वारा प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि अजाक्स की ओर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सामने आते हैं।
आलोचकों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेवारत आईएएस अधिकारियों को अजाक्स संगठन में पदाधिकारी बनने से रोका जाए और नियुक्त अधिकारी स्वयं भी इन पदों से हटकर निष्पक्षता का उदाहरण प्रस्तुत करें।
