इंदौर: संभाग की सबसे बड़ी केंद्रीय जेल में इस समय भक्ति का माहौल है. 2100 से ज्यादा कैदी, जिनमें 95 महिला बंदी शामिल हैं, माता अंबे की आराधना में लीन हैं. सेंट्रल जेल में साढ़े 500 से अधिक कैदी उपवास पर हैं और जेल परिसर में रोजाना आरती और गरबा का कार्यक्रम चलता है.सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि घटस्थापना के दिन से ही 500 पुरुष कैदी और 35 महिला कैदी उपवास पर हैं. इसमें एक महिला कैदी एक लौंग पर भी उपवास रखे हुए हैं.
शाम होते ही जेल में माता अंबे की मूर्ति के पास सभी कैदी एकत्रित होकर आरती करते हैं और उसके बाद गरबे का आयोजन शुरू होता है. पांच सालों से जारी इस परंपरा में कैदी ढोलक और संगीत की धुन पर गरबा कर माता की आराधना में डूबे रहते हैं. जेल अधीक्षक के अनुसार, यह गतिविधि न केवल कैदियों को मानसिक शांति देती है बल्कि उनके बीच अनुशासन और सामूहिक भावना भी बढ़ाती है. महिला-पुरुष कैदी देर रात तक गरबा करते हैं और भक्तिभाव में संकल्प लेते हैं कि जेल में रहते हुए भी धार्मिक अनुष्ठान का पालन करेंगे.
