मुंबई (वार्ता) मुंबई की एक सत्र अदालत ने हाल ही में लोक अदालत की कार्यवाही के तहत एक अपील पर सुनवाई करते हुए बॉलीवुड फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा की चेक अनादरण मामले में दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया और उन्हें आरोपों से बरी कर दिया।
एक स्थानीय अदालत ने वर्मा को जनवरी में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि उनके खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत मामला दर्ज होने के सात साल बाद यह सजा सुनाई गई थी। अदालत ने पहले उन्हें शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में 3.72 लाख रुपये देने का निर्देश दिया था।
फिल्म निर्माता की कंपनी के खिलाफ 2018 में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन व्यक्तिगत पहचान बांड भरने और 5,000 रुपये की नकद जमानत राशि जमा करने के बाद उन्हें जून 2022 में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
सत्र अदालत ने 13 सितंबर को अपील स्वीकार करते हुए कहा, “मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, अंधेरी, मुंबई द्वारा 21 जनवरी को दिया गया विवादित निर्णय और आदेश… एतद्द्वारा रद्द किया जाता है। समझौता ज्ञापन के मद्देनजर अपीलकर्ताओं को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है।”
वर्मा हाल के वर्षों में आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं क्योंकि उनकी फ़िल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हैं। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपना कार्यालय भी बेच दिया था।
