
जबलपुर। इंदौर के एयरपोर्ट रोड में नो एंट्री में भीषण सड़क के मामले के दौरान पुलिस आयुक्त इंदौर वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। इसके अलावा उप आयुक्त पुलिस ट्रैफिक इंदौर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। पुलिस आयुक्त की तरफ से बताया गया कि प्रारंभिक जांच में दोषी पाये गये 9 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा पुलिस की तरफ से स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की गयी। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद संज्ञान याचिका को इंदौर खंडपीठ स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये। याचिका पर अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है।
गौरतलब है कि इंदौर में एयरपोर्ट रोड पर सोमवार 15 सितम्बर की शाम को तेज रफ्तार ट्रक के चालक ने जमकर कोहराम मचाया था। ट्रक चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए लगभग एक किलोमीटर के रास्ते में कई वाहनों को टक्कर मारी थी। ट्रक की चपेट में आने के कारण दो लोगों की घटना स्थल में मौत हो गई। एक युवक की इलाज के दौरान मृत्यु हो गयी थी। इसके अलावा एक दर्जन व्यक्तियों को गंभीर चोटे आई थी। जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उक्त भीषण हादसे को लेकर अखबारों में प्रकाशित खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करने के निर्देश दिये थे। मामले में सीजे की अध्यक्षता वाली बेंच ने विगत 16 सितम्बर को याचिका की सुनवाई करते हुए पुलिस आयुक्त इंदौर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के आदेश जारी किये थे। इसके अलावा सरकार को निर्देशित किया है कि भविष्य में ऐसी घटना घटित नहीं हो इस संबंध में बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में न्यायालय को अवगत करवाये।
याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पुलिस आयुक्त इंदौर संतोष सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में घटना के लिए दोषी पाये गये 9 पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। उनकी भूमिका व लापरवाही की जांच करते जल्द ही चार्जशीट पेश की जायेगी। डीसीपी ट्रैफिक इंदौर ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। सरकार की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि ऐसी घटना दोबारा घटित नहीं हो इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये है।
युगलपीठ ने उक्त घटना को कानून-व्यवस्था और प्रशासन की बड़ी विफलता मानते हुए कहा कि नियमों का कड़ाई से पालन हुआ होता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। न्यायालय ने मामले में नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब सडक़ सुरक्षा के सख्त नियम मौजूद हैं, तो इस तरह के हादसे होना बेहद चिंताजनक है।
