नयी दिल्ली, 22 सितम्बर (वार्ता) केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) में हम अपने युवाओं को विकसित भारत के लिए आवश्यक कौशल, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से सशक्त कर रहे हैं।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्वी दिल्ली के ताहिरपुर स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में स्वाध्याय भवन का उद्घाटन करने जे बाद आज कहा कि मुक्त शिक्षा विद्यालय का पूर्वी क्षेत्रीय केंद्र केवल एक संस्थान नहीं है, बल्कि अवसर और सशक्तिकरण का द्वार है। ”अर्जित करो और सीखो” पहल में हमारे मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) की महत्वपूर्ण भूमिका है, जहां हम अपने युवाओं को विकसित भारत के लिए आवश्यक कौशल, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से सशक्त कर रहे हैं। शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विभिन्न भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान कर सकती है और देश भर के छात्रों को सशक्त बना सकती है।
उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि एआई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और एसओएल इस विजन को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह दिल्ली के कार्यबल को और अधिक दक्ष और उत्पादक बनाने के लिए एक केंद्रीय केंद्र बन सकता है। उन्होंने इस उपलब्धि को छात्रों के भविष्य और शिक्षा के प्रसार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया।
श्री प्रधान ने कहा कि यह नया भवन न केवल ईस्ट कैंपस की लंबित जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि तकनीकी संसाधनों, लाइब्रेरी और लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं से छात्रों को नियमित कॉलेज के स्तर की शिक्षा का अनुभव भी प्रदान करेगा। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में इस पहल से और अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि हर बार विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेना उनके लिए गर्व का विषय होता है और हर आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होता है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के सेवा पखवाड़े के तहत आयोजित किया गया है, जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे भारत में चल रहा है। इस दौरान रोजाना कोई न कोई नई योजना, नया कार्यक्रम या नया भवन जनता को समर्पित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि डिस्टेंस लर्निंग के दौरान कभी-कभी छात्र अपनी स्थिति को लेकर संकोच महसूस करते थे, लेकिन स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग (एसओएल) ने उन सभी के लिए नए अवसर खोले हैं, जो नियमित शिक्षा नहीं ले पाते, आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, या नौकरी और व्यवसाय में व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी एक साथ कई कोर्स करने की इच्छा रखती है, चाहे वह प्रोफेशनल कोर्स, फैशन डिजाइनिंग या अन्य पाठ्यक्रम हों और इसके साथ ही एसओएल से अतिरिक्त डिग्री हासिल करना चाहती है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शिक्षा प्राप्त करने में किसी उम्र की कोई सीमा नहीं होती। किसी भी उम्र में यदि किसी का मन सीखने और आगे बढ़ने का करता है, तो वे दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी कर सकते हैं।
उन्होंने सभी छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएँ और शिक्षा के माध्यम से अपने और समाज के भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग ने शिक्षा के माध्यम से छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। वर्तमान में चार लाख से अधिक छात्र इस ओपन लर्निंग प्रणाली से जुड़े हुए हैं। उन्होंने ईस्ट कैंपस के निर्माण को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अपने वक्तव्य में कहा कि पूर्वी दिल्ली के नए क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन केवल एक बुनियादी ढांचे की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अवसरों का द्वार है, जो सुनिश्चित करता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच में दूरी अब कभी बाधा नहीं बनेगी। यह केंद्र युवाओं को कौशल, आत्मविश्वास और नेतृत्व से सशक्त करेगा और भविष्य के नवोन्मेषकों तथा राष्ट्र निर्माताओं के लिए एक सच्ची कर्मभूमि बनेगा।
