मुंबई, 22 सितंबर (वार्ता) अमेरिका में एच-1बी वीजा के शुल्क में बेतहाशा बढ़ोतरी से सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में आईटी क्षेत्र की कंपनियों में सोमवार को भारी गिरावट देखी गयी और बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 466.26 अंक (0.56 प्रतिशत) लुढ़ककर 82,159.97 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स एक समय 600 अंक से अधिक की गिरावट के साथ 81,997 अंक तक उतर गया था। आईटी और फार्मा कंपनियों पर शुरू से ही अधिक दबाव देखा गया क्योंकि दोनों क्षेत्रों की दिग्गज कंपनियों के कई कर्मचारी अमेरिका में काम करते हैं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में टेक महिंद्रा का शेयर तीन प्रतिशत टूट गया। टीसीएस में 2.96 फीसदी, इंफोसिस में 2.55 फीसदी, सिप्ला में 2.14 और विप्रो में 2.11 प्रतिशत की गिरावट रही। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर भी 1.73 प्रतिशत टूटा। डॉ. रेड्डीज लैब में 1.48 प्रतिशत की गिरावट रही।
एनएसई की निफ्टी-50 सूचकांक भी 124.70 अंक यानी 0.49 प्रतिशत गिरकर 25,202.35 अंक पर बंद हुआ। मझौली और छोटी कंपनियों पर ज्यादा दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.74 फीसदी और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 1.17 फीसदी फिसल गया।
निफ्टी आईटी में 2.95 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 1.41 प्रतिशत की गिरावट रही। एफएमसीजी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टरों में भी गिरावट रही जबकि धातु और वित्तीय सेवा सेक्टर में लिवाली का जोर रहा।
अडानी इंटरप्राइजेज में सबसे अधिक 3.98 प्रतिशत की तेजी रही। इटरनल का शेयर 1.60 फीसदी, बजाज फाइनेंस का 1.37, अडानी पोर्ट्स में 1.20 और अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.10 प्रतिशत की तेजी रही। ट्रेंट और टाटा मोटर्स दोनों में 1.72 प्रतिशत, इंडसइंड बैंक में 1.38 प्रतिशत और सनफार्मा में 1.18 प्रतिशत की गिरावट रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो फाइनेंशल सर्विसेज के शेयर भी एक फीसदी से अधिक टूटे।
विदेशों में एशिया में जापान का निक्केई 0.99 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.22 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। हांगकांग के हैंगसेंग में 0.76 फीसदी की गिरावट रही। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 0.77 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 0.08 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे।

