गढ़ा ग्राम पंचायत में नहीं है मुक्ति धाम का रास्ता

गुना। जिला मुख्यालय से लगा ग्राम पंचायत गढ़ा के ग्रामीण वर्षों से एक गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। यहां न तो सही मुक्ति धाम है और न ही वहां तक जाने के लिए कोई रास्ता। मजबूरी में ग्रामीण खुले में ही अंतिम संस्कार करने को विवश हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और लोगों की पीड़ा बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। भीगते हुए नाले और कीचड़ से होकर श्मशान तक पहुंचना पड़ता

है। कई बार लाश को ले जाते वक्त ग्रामीणों को घंटों तक संघर्ष करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या से पूरी तरह वाकिफ हैं, लेकिन वर्षों से किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ना सरपंच सुनते हैं और ना सचिव। हाल ही में गढ़ा के एक परिवार ने भी इस समस्या को झेला है। प्रदीप शर्मा, जिनके पिता का हाल ही में खुले स्थान पर अंतिम संस्कार हुआ, ने बताया कि यह स्थिति बेहद दुखद है। वहीं

हरिप्रसाद शर्मा ने कहा कि नौ साल पहले उनकी बेटी का अंतिम संस्कार भी इसी तरह खुले में करना पड़ा था। वहीं पांच साल पूर्व विष्णु प्रसाद शर्मा का भी यहीं अंतिम संस्कार किया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि यहां से श्मशान स्थल जाने के लिए कोई पक्का मार्ग नहीं है। बरसात के दिनों में नाले में से होकर जाना पड़ता है, जिससे कई बार हादसे भी हो चुके हैं। जनपद पंचायत गुना की यह लापरवाही आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शासन स्तर पर विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि खर्च की जा रही है, तो गढ़ा जैसे ग्रामों में अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल पक्का मुक्ति धाम और वहां तक जाने के लिए मार्ग बनाया जाए।

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