
मंडला/मवई ।नर्मदा की पावन धरती, घने वनों की हरियाली और औषधीय पौधों की बहुलता… मवई का नाम आते ही मन में यही तस्वीर उभरती है। यह वह ग्राम है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण न केवल मंडला जिले, बल्कि प्रदेश और देश में अपनी अलग पहचान रखता है। फिर भी सात दशक की आज़ादी के बाद मवई अब तक विकास की मुख्य धारा से पूरी तरह नहीं जुड़ सका।
छत्तीसगढ़ की सीमा और नर्मदा उद्गम अमरकंटक के समीप होने के बावजूद मवई की नियति आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रही है। ग्राम पंचायत होने के साथ ही यह जनपद मुख्यालय भी है। अंग्रेजी हुकूमत के समय बना पुलिस थाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, वन परिक्षेत्र कार्यालय और अनेक विभागीय संस्थान यहां वर्षों से संचालित हैं। अधिकारी और कर्मचारी यहीं निवास करते हैं, जिससे जनसंख्या तो बढ़ी, पर योजनाबद्ध बसाहट आज भी अधूरी है।
मवई मुख्यालय में भूमि की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। सरकारी कार्यालयों और आवासीय परिसरों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाता, जबकि पास के रमतीला और कुर्सीपर गांवों में पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। उचित योजना और ईमानदार प्रयासों के अभाव में ये क्षेत्र अब भी विकास की प्रतीक्षा में हैं। स्वीकृत कॉलेज का भवन मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर और आईटीआई का भवन 5 किलोमीटर दूर धनगांव में निर्माणाधीन होना इस कमी का स्पष्ट उदाहरण है।
नई राह की उम्मीदें
हाल के वर्षों में कुछ सकारात्मक कदम भी उठे हैं। रमतीला रोड से बांधा किसान मोहल्ला तक सड़क निर्माण ने नई बसाहट की राह खोली है। किसानों की ज़मीनों का मूल्य बढ़ा है और लोग अब अपने खेतों में मकान बनाने को प्रेरित हो रहे हैं। थाने के पीछे मार्ग निर्माण और बाजार चौक से रमतीला तक बन रही सड़क भी विकास की नई आहट दे रही है। यदि ये कार्य ईमानदारी से पूरे हुए, तो मवई का चेहरा बदल सकता है।
*राजनीतिक इच्छा शक्ति की दरकार*
मवई के पास प्राकृतिक संपदा, औषधीय वनस्पतियों और पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। आवश्यकता है तो केवल सशक्त राजनीतिक इच्छा शक्ति और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण की। सरकारी जमीनों को चिन्हित कर अनाधिकृत कब्जों से मुक्त कराना, नई बसाहट के लिए व्यवस्थित प्लानिंग और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार ही मवई को ग्राम से नगर की ओर अग्रसर कर सकता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ नागरिकों, किसानों और युवाओं को मिलकर एक साझा संवाद शुरू करना होगा। मवई की भावी तस्वीर तब ही संवर सकेगी, जब राजनीति सेवा का संकल्प ले और प्रशासन उसे ईमानदारी से क्रियान्वित करे।
