संकट में ऑडिटोरियम: लापरवाही और राजनीतिकरण ने बिगाड़ा स्वरूप

विदिशा। सिविल लाइन क्षेत्र स्थित ऑडिटोरियम में इन दिनों राजनीतिक और गैर-राजनीतिक पुस्तक मेले समेत कई आयोजन हो रहे हैं। लेकिन इन आयोजनों से नगर पालिका या ऑडिटोरियम प्रबंधन को कितना शुल्क प्राप्त हो रहा है और उस शुल्क का रखरखाव में कैसे उपयोग हो रहा है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अधिकतर कार्यक्रमों के लिए ऑडिटोरियम निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि ऑडिटोरियम की वित्तीय स्थिति और रखरखाव व्यवस्था संकट में है।

वर्तमान हालात यह हैं कि ऑडिटोरियम की छत और दीवारों पर मधुमक्खियों के बड़े छत्ते लगे हैं और कुर्सियाँ धीरे-धीरे खराब हो रही हैं, जिससे भविष्य में बड़े आयोजनों के लिए इसका उपयोग मुश्किल हो सकता है।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी दुर्गेश ठाकुर के अनुसार, मार्च से अब तक करीब 1 लाख रुपए की रसीद कटी है। ऑडिटोरियम की सुरक्षा और रखरखाव के लिए पांच कर्मचारी तैनात हैं। चूंकि अधिकतर आयोजन सरकारी होते हैं, इसलिए उन्हें निशुल्क उपलब्ध कराना पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका को ऑडिटोरियम शुल्क और रखरखाव से संबंधित स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, ताकि यह सांस्कृतिक धरोहर फिर से अपनी पहचान बनाए रख सके।

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