जबलपुर: शहर की अधिकांश गली, मोहल्लों में अघोषित गार्बेज वल्नरेबल प्वॉइंट (जीवीपी) लगातार बढ़ते जा रहे हैं और लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आते जा रहे हैं। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीन कार्यप्रणाली से नगर निगम की कैडर व्यवस्था पर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। पिछले कई दिनों से देखा जा रहा है कि शहर में जगह-जगह कचरा डंप कराया जा रहा है जिससे गंदगी भी बढ़ती जा रही है। इसकी मुख्य वजह ये सामने निकलकर आ रही है कि नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में एक भी अधिकारी सांइस से जुड़े विषयों का जानकार नहीं है जबकि शहरवासियों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सलामत रखने के लिए निगम के स्वास्थ्य विभाग में साइंस से जुड़ा अधिकारी नियुक्त होना बेहद जरूरी है। जानकारी के अनुसार पिछले लंबे समय से नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग प्रभारी अधिकारियों के भरोसे ही चलता आया है पहले कभी सिविल इंजीनियर को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी गई थी तो कभी प्रकाश विभाग के कर्मचारी को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दे दी जाती है। ऐसे में शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह दम तोड़ते नजर आ रही है।
3 गार्बेज प्वाइंट के भरोसे सफाई व्यवस्था
जानकारी के अनुसार शहर में 3 गार्बेज प्वाइंट अभी तक बन पाए हैं। इसके अलावा ट्रिपर गाड़ियों का कचरा शहर में कहीं भी पलटाया जा रहा है और फिर ये स्थान गार्बेज प्वाइंट का रूप धारण करते जा रहा है। मतलब साफ है कचरा कलेक्शन तो हो रहा है लेकिन उसको कहीं भी पलटाया जा रहा है। उधर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्थित ढंग से नहीं होने के कारण शहर की कई सड़कों, गली, मोहल्लों में कचरे के ढेर देखे जा रहे हैं। आलम ये है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो रही है। ऐसे में डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अधिक बढ़ गया है। लेकिन जिम्मेदारों के कान में अभी भी जू नहीं रेंग रही है।
द्वितीय-तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों में आक्रोश
जानकारी के अनुसार नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में कैडर की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नगर निगम के जानकारों का कहना है कि निगम के स्वास्थ्य विभाग में चपरासी, सुपरवाइजर, माली और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को अधिकारी बनाकर बैठा दिया गया है। इससे न केवल द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों में आक्रोश देखने मिल रहा है, बल्कि नगरीय प्रशासन विभाग की कैडर व्यवस्था को भी खत्म करते देखा जा रहा है।
