जबलपुर/मंडला: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि यह दिन 168 साल पहले अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छेड़े गए उस संघर्ष की याद दिलाता है, जिसने रानी दुर्गावती की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इतिहास में पिता-पुत्र की ऐसी अनोखी जोड़ी नहीं मिलती, जिन्होंने एक साथ देश के लिए बलिदान दिया हो।
सीएम ने बताया कि अंग्रेजों ने धर्म परिवर्तन, सत्ता स्वीकारने और विरोध छोड़ने की तीन शर्तें रखीं, लेकिन शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने दृढ़तापूर्वक कहा – “न मैं धर्म बदलूंगा, न सत्ता स्वीकार करूंगा और न विरोध करना छोड़ूंगा।” इसके बाद उन्हें बिना मुकदमे के जबलपुर कोतवाली के सामने तोप से उड़ाने का अमानवीय निर्णय लिया गया।
डॉ. यादव ने कहा, जन्म और मृत्यु तो सभी को होती है, लेकिन जो मृत्यु को बलिदान बना देता है, वही अमरत्व पाता है। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह आज भी अमर हैं और हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने रानी दुर्गावती और इन बलिदानी महापुरुषों की स्मृति में कई स्मरणीय कार्य किए हैं। मंडला किले में उनके बलिदान को स्मरण किया गया है और नगर निगम ने उनके सम्मान में छत्र का निर्माण किया है।सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि बलिदानी महापुरुषों की प्रेरणा यही है कि हम आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी को अपनाकर राष्ट्र की शक्ति को बढ़ाएं।
