पराली जलाने के मामले से निपटने के लिए सख्त रवैया अपनाने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुझाव

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत माने जाने वाले पराली जलाने के मामले से निपटने के लिए सख्त रवैया अपनाने का बुधवार को सुझाव दिया।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हालांकि किसान देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें अनियंत्रित रूप से पराली जलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीठ ने सुझाव दिया कि पराली जलाने से रोकने के लिए उन्हें सख्त सजा दी जा सकती है।
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना हर साल अक्टूबर और नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक है।
शीर्ष अदालत ने सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह सुझाव दिया।
अदालत को बताया गया कि पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को सब्सिडी और उपकरण दिए जा रहे हैं। एक वकील ने कहा कि शीर्ष अदालत ने 2018 से इस मामले में व्यापक आदेश पारित किए हैं, लेकिन किसान अपनी बेबसी का दावा कर रहे हैं।
इस पर पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा, “आप दंड के कुछ प्रावधानों के बारे में क्यों नहीं सोचते? अगर कुछ लोग सलाखों के पीछे हैं, तो इससे सही संदेश जाएगा। अगर पर्यावरण की रक्षा करने का आपका सच्चा इरादा है तो फिर आप क्यों कतरा रहे हैं?”
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पीठ हुए ने बताया कि फसलों से बची पराली का उपयोग जैव ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है।
पीठ ने कहा, “किसान विशेष हैं और हम उनकी बदौलत ही खाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पर्यावरण की रक्षा नहीं कर सकते।”
अदालत ने केंद्र से पूछा कि वह पराली जलाने पर दंडात्मक प्रावधान को फिर से लागू करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भाटी ने कहा कि अधिनियम के तहत प्रावधान हैं और अंततः यह कार्यान्वयन से संबंधित है और कुछ दोषी अधिकारियों को दंडित किया जा सकता है।
पीठ ने कहा, “गलती करने वाले अधिकारियों को भूल जाइए। आप किसानों के लिए दंडात्मक प्रावधानों पर विचार क्यों नहीं करते? उन्हें इनाम तो दीजिए, लेकिन साथ में दंड भी दीजिए।”
उन्होंने जवाब दिया, “यह देश की नीति कभी नहीं रही।”
पीठ ने कहा, “किसान हमारे दिल में हैं, लेकिन इस पर विचार करें, अन्यथा हम परमादेश जारी करेंगे।”
पंजाब सरकार के वकील ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने के मामलों में कमी आई है और इस वर्ष और भी अधिक लक्ष्य हासिल किए जाएँगे।
राज्य सरकार के वकील ने कहा कि अगर छोटे किसानों को गिरफ्तार किया गया, तो उनके आश्रितों का क्या होगा? पीठ ने कहा कि यह कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि एक संदेश तो देना ही होगा।
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने स्थिति रिपोर्ट जमा होने के बाद अगले सप्ताह मामले पर सुनवाई करने को कहा।

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