इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर हुआ ट्रक हादसा केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि हमारी स्थानीय प्रशासन की असफलताओं का प्रमाण है. सडक़ पर भीड़, असावधान ट्रैफिक मैनेजमेंट और नियमों की धज्जियां उड़ाता पुलिस और परिवहन तंत्र,सब मिलकर यह साबित करते हैं कि आम आदमी का जीवन इस देश में सबसे सस्ता है.एक बेकाबू ट्रक ने भीड़ और कई वाहनों को रौंद डाला. आग भडक़ गई, चीख-पुकार मच गई, लोग अस्पतालों में तड़पते रहे. दो मौतों की पुष्टि सोमवार को हो चुकी थी. जबकि एक व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु मंगलवार को अस्पताल में इलाज के दौरान हुई. सवाल यह है कि शहर के बीचोबीच शाम 7 बजे से पहले भारी वाहन घुसा ही कैसे ? क्या ट्रैफिक पुलिस सो रही थी ? क्या प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी है ? बेलगाम ट्रक का शहर के अंदर भीड़-भाड़ वाले इलाके में बेकाबू होकर घुस जान कोई नई घटना नही है. सतना में
(7 अगस्त 2013) ऐसी ही घटना हो चुकी है, जिसमें 11 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी. जाहिर है स्थानीय प्रशासन ने उस घटना से कोई सबक नहीं लिया. जबकि तब ही पूरे मध्य प्रदेश में यह अलर्ट किया जाना चाहिए था जिससे इस दुर्घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो. इंदौर जैसे शहर में, जो स्मार्ट सिटी कहलाता है, वहां ट्रैफिक मैनेजमेंट की यह दुर्दशा शर्मनाक है. पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से रोज़ाना नियम तोड़ते ट्रक, बिना फिटनेस के वाहन, ओवरलोडिंग और नशे में धुत ड्राइवर बेखौफ घूमते हैं. यही बेपरवाही हादसों को जन्म देती है. हादसा होने पर कुछ घंटों की सक्रियता दिखाई जाती है, लेकिन फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है.
यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि हर मौत को आंकड़ा बना दिया जाता है कि,इतनी मौतें, इतने घायल, इतने गंभीरज् और उसके बाद कागजों पर कार्रवाई पूरी. इंसान की जान की कोई कीमत ही नहीं. इंदौर की घटना ने यह साफ कर दिया है कि पुलिस और ट्रांसपोर्ट सिस्टम सड़ा हुआ है. भारी वाहनों के प्रवेश की अनुमति किसके इशारे पर मिलती है ? कौन अधिकारी गश्त पर था ? दमकल और एंबुलेंस देर से क्यों पहुंचे ? यह सब जिम्मेदारी तय करने वाले सवाल हैं.
जनता अब और कितनी मौतें सहे ? सडक़ें केवल गाडिय़ों के लिए नहीं, इंसानों के जीवन की सुरक्षा के लिए भी होती हैं. जब स्थानीय प्रशासन अपने कर्तव्य से भागेगा, तो ऐसे हादसे होंगे ही. यह सिस्टम तभी बदलेगा जब दोषियों को कड़ी सज़ा मिले .
इंदौर का यह हादसा चेतावनी है. अगर पुलिस और प्रशासन अब भी नहीं जागे, तो हर शहर में यही मंजर दोहराया जाएगा. यह केवल ट्रक चालक की गलती नहीं, यह पूरे स्थानीय सिस्टम का अपराध है. जिनकी जान गई , वे किसी के घर के चिराग थे. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव घटना की जानकारी मिलते ही इंदौर आए और अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायलों से मिले . उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों का आकलन किया और दोषियों पर कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए .
