नयी दिल्ली, 16 सितंबर (वार्ता) भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमरेंदु प्रकाश ने मंगलवार को कहा कि भविष्य में कंपनी की सभी परियोजनायें शुरू से ही हरित प्रौद्योगिकी पर आधारित होंगी।
श्री प्रकाश ने यहां सेल की 53वीं वार्षिक आम बैठक को वर्चुअली संबोधित करते हुये वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी के मजबूत प्रदर्शन और भविष्य के विकास के लिए इसके रणनीतिक रोडमैप को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के अनुरूप कंपनी ने अपनी यात्रा के अगले चरण की शुरुआत कर दी है, जहां आगामी परियोजनाएं शुरू से ही हरित प्रौद्योगिकियों, कुशल लॉजिस्टिक्स और ग्राहक-केंद्रित समाधानों को एकीकृत करेंगी। यह यात्रा प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण, पर्यावरण अनुकूल उपायों और लोगों पर आधारित होगी।उन्होंने कहा कि सेल अपनी हरित इस्पात यात्रा को आगे बढ़ा रहा है – जिसमें हाइड्रोजन आधारित इस्पात निर्माण के परीक्षण, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस), बायोचार इंजेक्शन तथा नवीकरणीय ऊर्जा पहलों को शामिल किया गया है।
श्री प्रकाश ने कहा, “ जलवायु परिवर्तन हमारे उद्योग के लिए एक निर्णायक चुनौती है। विश्व एक हरित परिवर्तन के मोड़ पर खड़ा है और सेल इस बदलाव की अगुवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने शेयरधारकों से कहा, ”इस्पात को अक्सर आधुनिक सभ्यता की रीढ़ कहा जाता है – मजबूत, लचीला और टिकाऊ। इस्पात की तरह, हमारी कंपनी भी अग्नि-परीक्षा से गुजरी है, चुनौतियों से आकार लेती रही है और अनुभव से मजबूत हुई है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि सेल 2047 तक विकसित भारत की ओर देश की विकास यात्रा में एक साक्षी और एक भागीदार, दोनों के रूप में मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने बुनियादी ढांचा, रेलवे, रक्षा, ऊर्जा आदि सहित विविध क्षेत्रों के लिए इस्पात आपूर्ति करते हुये राष्ट्र निर्माण में सेल की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराया। उन्होंने कहा, ”सेल का इस्पात देश की विकास गाथा के केंद्र में है।”
भविष्य के बारे में बात करते हुये उन्होंने बताया कि दो परिवर्तनकारी कार्यक्रम शुरू किये गये हैं – प्रवर्तनम (डिजिटल परिवर्तन) और सेल दर्पण (एचआर परिवर्तन)। इनका उद्देश्य कंपनी के संयंत्रों और खदानों में एक सशक्त, आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि सेल आने वाले कल के लिए तैयार है।

