
नई दिल्ली, 15 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ के दायरे में राजनीतिक दलों को लाने की याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायाधीश न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि राजनीतिक दलों पर ये अधिनियम लागू करने से ‘भानुमती का पिटारा’ खुल जाएगा तथा यह ब्लैकमेल और दुरुपयोग का एक साधन बन जाएगा।
पीठ ने केरल उच्च न्यायालय के संबंधित फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता की दलीलें सुनने के बाद कहा, “माफ़ कीजिए! खारिज!”
अदालत ने पूछा, “आप कार्यस्थल में राजनीतिक दलों को कैसे शामिल करते हैं?” उन्होंने कहा कि यह एक संगठन है।
इस पर पीठ ने कहा, “जब कोई सदस्य किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो वह कोई नौकरी नहीं होती।”
