जबलपुर: हर दिन साइबर ठग नए-नए पैंतरे आजमा कर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। साइबर ठग पुलिस से बचने और क्राइम करने के लिए फर्जी सिम का सहारा लेते हैं। साइबर ठगी का मकडज़ाल और काली कमाई का धंधा सिम विक्रेताओं, एजेंट्स की सांठगांठ से चल रहा है। पुलिस ने ऐसे कई मामलों का भंडाफोड़ किया है, जहां नागरिकों के नाम पर सिम कार्ड इश्यू कराकर उसे अपराधियों के हाथ पहुंचाया जा रहा है।
विदित हो कि फर्जीसिम गिरोह पर प्रहार करने राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय एवं जिला पुलिस बल द्वारा मध्यप्रदेश के 20 जिलो में एक साथ 11 सितम्बर को ऑपरेशन चला। जिसमें जबलपुर पुलिस ने भी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ऑपरेशन में अभी तक 44 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे चार आरोपी जबलपुर राज्य साइबर पुलिस ने पकड़े जो फर्जी सिम विक्रेता है।
इन अपराधों में इस्तेमाल
साइबर ठग फर्जी सिमों से नागरिको के साथ, डिजीटल अरेस्ट, लोन एप फ्रॉड, वित्तीय फ्रॉड, जैसे कई प्रकार के सायबर अपराधों को अंजाम दे रहे है।
ऐसे कर रहे फर्जीवाड़ा-
तरीका नंबर 1-
मोबाइल सिम को लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले लोग गांवों में जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देते हैं और उनसे आधार की डिटेल लेकर या बायोमेट्रिक, अंगूठा लगवाकर उनके नाम से सिम कार्ड एक्टिवेट करवा लेते हैं। फिर इस सिम को पैसे लेकर अपराधारियों को बेच दिया जाता है।
तरीका नंबर 2-
जब आप दुकान या स्टोर पर सिम खरीदने जाते हैं तो दुकानदार आपके आधार पर एक सिम एक्टिवेट करके आपको दे देता है फिर पुन: किसी बहाने से आपका अंगूठा लगवाकर 2-3 और सिम एक्टिवेट करके अपराधियों या धोखाधड़ी करने वालों को बेच देता है।
ये बरतें सावधानी-
सिम खरीदने के लिए ऑफिशियल स्टोर पर ही जाएं। सिम कार्ड को हमेशा पैकेट बंद ही खरीदें और पहले से एक्टिवेट सिम को खरीदने से बचें। सिम के नाम-पते का संबंधित टेलीकॉम कंपनी के ऐप से वेरिफिकेशन जरूर करें। कहीं भी डॉक्यूमेंट दें, उसमें उपयोग का उद्देश्य लिखकर डॉक्यूमेंट में लगी फोटो पर क्रॉस साइन कर दें। इससे डॉक्यूमेंट का दूसरा इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। यदि सरकारी योजनाओं के नाम से कोई आपकी निजी जानकारी या बायोमेट्रिक धंब, अंगूठा ले रहे हों तो वास्तविकता का पता लगा लें।
7500 फर्जी सिमों से साइबर फ्रॉड
साइबर पुलिस के पास पहुंचे डाटा के मुताबिक लगभग 7500 फर्जी सिम जारी की गई जिसके जरिए सायबर फ्रॉड हुआ। जिसके चलते नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर देश के अलग-अलग राज्यों से लगभग 6200 शिकायते दर्ज है। मप्र के 20 जिलों के थानों में 94 के खिलाफ 50 एफआईआर दर्ज हुई है।
