इंद्र के घमंड को तोड़ने भगवान ने गोवर्धन पर्वत उठाया, लगे 56 भोग

ग्वालियर। माधव मंगलम गार्डन जयेंद्रगंज में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध भागवताचार्य श्री रसराज मृदुल महाराज ने कहा कि जब वृंदावनवासियों ने भगवान कृष्ण के कहने पर इंद्र की पूजा करना बंद कर दिया, तब इंद्र ने लगातार बारिश की बारिश से बचने के लिए भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया।

महाराज श्री ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था लेकिन कंस से बचने के लिए उन्हें वासुदेव ने गोकुल में यशोदा और नंद के पास पहुंचा दिया जहां उन्होंने बालपन बिताया कृष्ण बचपन से ही नटखट थे जो गोपियों को दही और माखन चुराते थे मथुरा के राजा कंस ने श्री कृष्ण को करने के लिए एक राक्षसी पूतना को भेजा था जिसे भगवान को दूध पिलाकर मारना चाहा लेकिन भगवान ने उसे मार डाला।

महाराजश्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की शिकायते हर दिन यशोदा के पास आती थी जब यशोदा उससे पूछती तो वे अपने मुख पर लगे मख्खन को दिखा देते जिससे यह पता चलता है कि भगवान कितने चतुर थे श्री कृष्ण ने कईअसुरों का वध किया श्री कृष्णा की माखन चोरी की घटना उनकी नटखट बाल लीलाओं का हिस्सा है जिससे उनका नाम माखन चोर पड़ गया उन्होंने बताया श्री कृष्ण गोपियों के हृदय से प्रेम रूपी माखन चुराकर उन्हें ज्ञान का प्रसाद देते थे महाराज श्री ने कहा गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पड़वा को मनाई जाती है जिसमें भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा होती है कथा में आए सभी भक्तों ने भगवान गोवर्धन की आरती की आरती के उपरांत प्रसादी वितरण किया गया।

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