भोपाल। शैक्षणिक जगत में भारी सनसनी फैलाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एलएनसीटी समूह के शीर्ष संचालकों पर 200 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का आपराधिक मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि संस्था के संसाधनों का उपयोग शिक्षा और जनहित के बजाय परिवार और निजी कंपनियों के लाभ के लिए किया गया।
एफआईआर पूर्व चेयरमैन अनिल संघवी की शिकायत पर दर्ज की गई, जिन्होंने अपने कार्यकाल में संस्था का फॉरेंसिक ऑडिट कराया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एडहॉक समिति की जांच रिपोर्ट में 2021 से 2025 तक हुए कई बड़े घोटाले उजागर हुए।
जांच में सामने आया कि 32 करोड़ का बैंक लोन श्री आस्था फाउंडेशन के नाम पर लिया गया, लेकिन इसका उपयोग एच.के. कल्चुरी ट्रस्ट के पुराने कर्ज चुकाने में किया गया।
केवल 21 दिन में 21.90 करोड़ पारिवारिक ट्रस्ट के कर्ज चुकाने में खर्च हुए।
12.15 करोड़ का टर्म लोन एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज के नाम लिया गया, लेकिन निजी ट्रस्ट के ऋण उतारने में लगाया गया।
छात्रों से वसूली गई बस-हॉस्टल फीस 8.22 करोड़ निजी खातों में डायवर्ट।
छात्रवृत्ति की 49.74 लाख राशि सीधे चौकसे परिवार की कंपनी के खाते में भेजी गई। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
