
रीवा।राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य श्रीमती मेघा पवार ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में बच्चों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की. बैठक में आयोग की सदस्य श्रीमती पवार ने कहा कि बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें. बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में किसी तरह की कोताही न बरतें.
संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा का आधार है. कम पोषित बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्र स्तर पर चिन्हांकन किया जाता है. कमजोर बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराकर उनके स्वास्थ्य में सुधार करें. पोषण पुनर्वास केन्द्र की कोई भी सीट रिक्त नहीं रहे इसे सुनिश्चित करें. पोषण पुनर्वास केन्द्र से घर जाने के बाद बच्चे के स्वास्थ्य का नियमित अंतराल से फालोअप करें. श्रीमती पवार ने कहा कि स्कूल बसों तथा छात्रावासों में पॉक्सो अधिनियम से जुड़ी जानकारी दर्ज कराएं. छात्रावासों और स्कूलों में भी अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देने के लिए कार्यक्रम आयोजित करें. सभी स्कूलों और छात्रावासों के बाहर शिकायत पेटी लगाएं जिसमें कोई भी छात्र-छात्रा अपनी परेशानी बता सके. पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं. बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास नयन सिंह ने कहा कि पोषण पुनर्वास केन्द्र में नियमित रूप से कम पोषित बच्चे भेजे जा रहे हैं. इनका पूरा फालोअप भी किया जा रहा है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से पॉक्सो अधिनियम के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. श्री सिंह ने बच्चों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. बैठक में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा तथा विभागीय समन्वय से बाल संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजीव शुक्ला, जिला परिवहन अधिकारी मनीष त्रिपाठी, सहायक संचालक शिक्षा राजेश मिश्रा, बाल संरक्षण अधिकारी स्वाति श्रीवास्तव, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास आशीष द्विवेदी, श्रम निरीक्षक आशुतोष सिंह तथा बच्चों के कल्याण से जुड़ी सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे. बैठक से पहले आयोग की सदस्य ने बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान श्रीमती पवार ने किशोर न्याय बोर्ड के अशासकीय सदस्यों से बाल संप्रेक्षण गृह की व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की.
