नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने संबंधी राष्ट्रपति संदर्भ मामले की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के नौवें दिन बुधवार को नेपाल का जिक्र आया।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने नेपाल में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का उल्लेख किया, जिसमें अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है। पीठ ने वहां चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए भारतीय संविधान की सराहना की।
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, “हमें अपने संविधान पर गर्व है… देखिए हमारे पड़ोसी देश… (नेपाल) में क्या हो रहा है! हमने देखा है कि नेपाल में क्या हुआ।”
पीठ ने पड़ोसी देश में व्याप्त तनाव और पिछले साल हुए हिंसक आंदोलन की ओर इशारा करते हुए बांग्लादेश का भी नाम लिया।
न्यायालय ने कहा कि देश पिछले 75 वर्षों से संविधान और लोकतंत्र के साथ चल रहा है। चाहे 90 फीसदी विधेयक रोके गए हों या 50 फीसदी।
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि वह गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रखेगा।
