
जबलपुर। निजी जमीन पर पुरूषार्थी कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड ने दावा करते हुए सिविल न्यायालय ने परिवाद दायर किया था। सिविल जज अभिसारिका माहुने ने सुनवाई के दौरान पाया कि सोसायटी का उक्त जमीन पर अधिकार नहीं है। सिविल कोर्ट ने सुनवाई के बाद परिवाद को खारिज कर दिया।
पुरूषार्थी कॉपरेटिव सोसायटी की तरफ से दायर किये गये परिवाद में कहा गया था कि विजय कुमार भार्गव सहित अन्य अनावेदकों के द्वारा सोसायटी की जमीन को अनावेदक संजय कुमार कापडी को बेच दिया गया है। परिवादी की तरफ से सिविल न्यायालय को बताया गया था कि वाद ग्रस्त भूमि के संबंध में सोसायटी की तरफ से साल 2009 में परिवाद दायर किया गया था। जिसे साल 2019 में वापस ले लिया गया था। इसके बाद सोसायटी ने वाद ग्रस्त भूमि नगर निगम को पार्क बनाने के लिए प्रदान कर दी। नगर निगम ने वाद ग्रस्त भूमि में झूले लगवा दिये थे। जिसके खिलाफ परिवादियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस के सोसायटी ने दूसरी बाद उक्त परिवाद पेष किया है। हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट को 6 माह में परिवाद के निराकरण का आदेश जारी किया था।
हाईकोर्ट ने वाद ग्रस्त भूमि पर झूले लगाये जाने के संबंध में कोई आदेश पारित किया गया था। जिसके कारण हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। अपील की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट को दो माह में परिवाद का निराकरण करने के आदेश जारी किये थे। सिविल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि वाद ग्रस्त भूमि परिवादी की निजी भूमि है। सिविल कोर्ट ने सुनवाई के बाद परिवाद को खारिज कर दिया। परिवादी की तरफ से अधिवक्ता गिरीश श्रीवास्तव तथा बी पी तिवारी ने पैरवी की।
