आज लोकतंत्र पर खतरा: दिग्विजय 

इंदौर। पूर्व सांसद एवं जननेता कॉमरेड होमी एफ. दाजी की जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत के अवसर पर आज इंदौर के गांधी हॉल प्रांगण में “भारत में समाजवाद – संभावनाएं एवं चुनौतियां” विषय पर एक स्मृति राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में समाजवाद का लक्ष्य आजादी आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद हमारी नीतियों का आधार रहा है। नेहरू और इंदिरा के काल में जमींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार, मिश्रित अर्थव्यवस्था, वोट का समान अधिकार, आरक्षण पब्लिक सेक्टर, मजदूर हितैषी कानून समाजवादी नीतियों के द्योतक थे। आज उन्हीं अधिकारों, कानूनों पर हमला हो रहा है।

समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की जरूरत है। आज लोकतांत्र पर ख़तरा है। टेक्नोलॉजी और अन्य माध्यमों से लोकतांत्र पर चोट की जा रही है। आज इन मुद्दों पर जनांदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। आज होमी दाजी जैसे जननेता की राह पर चलने की जरूरत है।

समाजवादी विचारक एवं प्रगतिशील लेखक संघ मध्यप्रदेश के राज्य सचिव मंडल सदस्य सत्यम सागर ने अपने संबोधन में कहा कि समाजवाद हमारे आजादी के आंदोलन का लक्ष्य था। समाजवादी आंदोलन ने देश को बेह्तरीन लेखक?, कवि, कलाकार, फ़िल्मकार दिए जिनने आम जनता के मुद्दों को आवाज दी। संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और प्रजातंत्र हमारे संविधान के मूल आधार हैं। आज़ादी ने प्रजा को नागरिक बनाया था। आज हम नागरिकों को 5 किलो राशन की लाइन में खड़ा कर फिर प्रजा बना रहे हैं।

समान निःशुल्क शिक्षा, रोजगार गारंटी, भूमि सुधार, सबके लिए आवास समाजवाद की बुनियादी जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि संसाधनों पर समाज की मिल्कियत हो। लेनिन, चेग्वारा, नेहरू ने इसे सम्भव बनाया तो यह आज भी सम्भव है।

विषय प्रवर्तन करते हुए समाजवादी विचार प्रसार केंद्र न्यास के प्रबंध न्यासी अरविन्द पोरवाल ने कहा कि आज कॉमरेड होमी दाजी की जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत है और साथ ही भारत में समाजवाद की सौ वर्ष की यात्रा को याद करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि कॉमरेड दाजी ने समाजवाद को केवल सिद्धांत न मानकर उसे जिया और मजदूरों-किसानों व आम जनता के संघर्षों से जोड़ा। भारत में समाजवाद की यात्रा रूसी क्रांति की गूँज से लेकर स्वतंत्र भारत की पंचवर्षीय योजनाओं, राष्ट्रीयकरण और प्रगतिशील सुधारों तक फैली है। नई आर्थिक नीतियों (1991) ने समाजवाद को हाशिये पर धकेला, लेकिन आज की विषम परिस्थितियों में समाजवाद का पुनराविष्कार आवश्यक है। यही कॉमरेड होमी दाजी की स्मृति में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

आमंत्रित अतिथियों का सूत की माला एवं स्मृति चिन्ह द्वारा स्वागत स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, श्रम संगठनों की संयुक्त अभियान समिति के संयोजक एवं इंटक (INTUC) के प्रदेश अध्यक्ष श्यामसुंदर यादव, अभ्यास मंडल के शिवाजी मोहिते, रामस्वरूप मंत्री, कैलाश लिम्बोदिया, हरनाम सिंह, फादर पायस, मनोहर लिम्बोदिया, राहुल निहोरे, सारिका श्रीवास्तव, योगेन्द्र महावर, , प्रकाश पाठक ने किया।

अध्यक्षीय भाषण श्यामसुंदर यादव ने दिया और

आभार प्रदर्शन कॉमरेड रुद्रपाल यादव द्वारा किया गया।

 

कार्यक्रम का संचालन विवेक मेहता ने किया।

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