
सौसर। नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणेश उत्सव की धूम अपने चरम पर है। घर-घर एवं सार्वजनिक पंडालों में विराजे संकट मोचक गणपति बप्पा की आराधना और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। शनिवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भगवान गणेश के विसर्जन का सिलसिला शुरू होगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है, वहीं चंद्रग्रहण के चलते विसर्जन की तिथियों को लेकर कुछ असमंजस भी बना हुआ है।
चंद्रग्रहण के कारण संशय
इस बार अनंत चतुर्दशी के दिन चंद्रग्रहण का संयोग पड़ रहा है। परंपरागत रूप से अनंत चतुर्दशी पर ही गणेश विसर्जन किया जाता है, लेकिन ग्रहण के कारण कई श्रद्धालु अगले दिन मूर्ति विसर्जन करने की तैयारी कर रहे हैं। इस वजह से शहर और ग्रामीण अंचल में विसर्जन की तारीख को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस प्रशासन, नगर पालिका और राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार बैठकें कर दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं। विशेष रूप से नदियों और घाटों पर सुरक्षा बलों की तैनाती, गोताखोरों की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य अमले की ड्यूटी सुनिश्चित की जा रही है।
कन्हान और जाम नदी के घाटों पर होगा मुख्य विसर्जन
क्षेत्र की जीवनदायिनी कन्हान और जाम नदी के घाटों पर परंपरा के अनुसार मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। नगर पालिका द्वारा घाटों की सफाई, रोशनी और बैरिकेडिंग का काम किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
भक्ति और उल्लास से सराबोर अंचल
शहर की गलियों और चौराहों पर सजाए गए गणेश पंडालों में हर शाम भजन, सांस्कृतिक आयोजन और महाआरती हो रही है। घर-घर विराजे भगवान गणेश की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था को प्रदर्शित कर रही हैं। बच्चे और युवा विसर्जन जुलूस की तैयारी में जुट गए हैं, वहीं ढोल-ताशों की गूंज ने उत्सव को और भी जीवंत बना दिया है।
श्रद्धालुओं से अपील
प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे विसर्जन के दौरान निर्धारित मार्ग और समय का पालन करें, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छोटे और ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन प्राथमिकता से करें।
