नयी दिल्ली, 02 सितंबर (वार्ता) भारत में डीपटेक कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन इंडिया 2025 के पहले दिन वेंचर कैपिटल कंपनियों के एक समूह ने इंडिया डीपटेक अलायंस (आईडीटीए) के गठन की घोषणा करते हुये कहा कि संस्थापक सदस्यों ने एक अरब डॉलर पूंजी की प्रतिबद्धता जतायी है।
वेंचर कैपिटल कंपनी सेलेस्टा कैपिटल के संस्थापक प्रबंधक साझेदार श्रीराम विश्वनाथन ने यहां द्वारका स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा, “आज अग्रणी वैश्विक और भारतीय निवेशकों के गठबंधन की तरफ से मुझे इंडिया डीपटेक अलायंस के गठन की घोषणा करने का सौभाग्य मिला है, उद्योग का गठबंधन जो भारत में जीवंत डीपटेक इकोसिस्टम बनाने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ काम करने की इच्छा रखता है।”
श्री विश्वनाथन ने कहा कि आईडीटीए का उद्देश्य भारत में नयी परिभाषाएं गढ़ने वाली डीपटेक कंपनियों के निर्माण के लिए निजी पूंजी और विशेषज्ञता मुहैया कराना है ताकि वे दुनिया को अपनी सेवाएं प्रदान कर सकें, और अमेरिका-भारत गलियारे को मजबूत किया जा सके।
उन्होंने बताया कि संस्थापक सदस्यों ने कुल एक अरब डॉलर की पूंजी प्रतिबद्धता जाहिर की है और आने वाले दिनों में सदस्यता बढ़ने के साथ इस आंकड़े में काफी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
संस्थापक सदस्यों में सेलेस्टा कैपिटल के अलावा एक्सेल, प्रेमजी इनवेस्ट, ब्लूम वीसी, गाजा कैपिटल, आईबीएस, ड्रीम वेंचर्स और टेनेसिटी वेंचर्स शामिल हैं। उन्होंने भारत के लंबे समय तक जारी रहने वाले प्रौद्योगिकी विकास में विश्वास रखने वाली और कंपनियों से आईडीटीए से जुड़ने की अपील की।
सदस्य अगले पांच-दस साल में भारत में पंजीकृत डीपटेक कंपनियों सार्थक निवेश करेंगे। ये कंपनियां सेमीकंडक्टर, रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा उपकरण, ऊर्जा, जलवायु और डिजिचल अर्थव्यवस्था जैसे किसी भी क्षेत्र की हो सकती हैं। उन्हों आईडीटीए द्वारा मेंटरशिप, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंच और विदेशी बाजारों में प्रवेश में मदद मुहैया कराई जायेगी ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक मंच पर पहुंच सकें।
श्री श्रीनिवासन ने कहा कि वैश्विक नवाचार की अगली सीढ़ी डीपटेक है। यह अगली पीढ़ी के नवाचारी स्टार्टअप तैयार करने का अवसर है जिनके पास पूरी दुनिया के लोगों के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता हो, और इसके लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती।
