जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि गंदे हाथ से आया हुआ व्यक्ति राहत का हकदार नहीं है। एकलपीठ ने याचिका में तथ्यों को छुपाये जाने को गंभीरता से लेते हुए याचिकाकर्ता का 25 हजार रूपये की कॉस्ट लगाई है। एकलपीठ ने कॉस्ट की राशि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की खाते में जमा किये जाने के आदेश जारी करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
सहकारी समिति पीपाखेडा जिला मैहर के दिपेंद्र सिंह की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि एसडीएम राजस्व ने वसूली के लिए आरसीसी जारी किये जाने को चुनौती दी गयी थी। हाईकोर्ट ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी प्रकार की कठोर कार्यवाही नहीं किये जाने के आदेश जारी किए थे। पिछलीे सुनवाई के दौरान एसडीएम राजस्व ने न्यायालय ने उपस्थित होकर बताया गया कि उन्हें पदभार ग्रहण किये हुए एक माह हुआ है। पूर्व एसडीएम के द्वारा की गयी कार्यवाही के संबंध में हलफनामा प्रस्तुत करने में खुद को असक्षम बताया था। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कलेक्टर मैहर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश जारी किये थे।
कलेक्टर मैहर ने रीना बटाल ने हाईकोर्ट में उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगते हुए बताया कि लिपिक के द्वारा याचिका की जानकारी ओआईसी को नही दी गयी थी। लिपिक को कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गयी है। याचिकाकर्ता के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने प्रकरण दर्ज था। याचिकाकर्ता ने उक्त प्रकरण में न्यायालय से जमानत प्राप्त नहीं की है।
शासकीय राशि की वसूली के लिए याचिकाकर्ता को दो बार नोटिस जारी किये गये थे। याचिकाकर्ता की तरफ से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। जिसके बाद राशि वसूली के लिए आरसीसी जारी की गयी थी।एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के उल्लेख याचिका में नहीं किया था। एकलपीठ ने उक्त तलख टिप्पणी करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
