25 वर्ष पूर्व लगाया संस्कार शिक्षा का पौधा वृक्ष बन गया

(सुनिलयोगी)बागली। बागली जनपद क्षेत्र के अंतिम छोर पर सन 2000 में कुछ प्रबुद्ध वर्ग नागरिकों ने भारतीय संस्कृति और क्षेत्रीय संस्कृति को शिक्षा के रूप में देने का कार्य आरंभ किया हालांकि इन कार्यकर्ताओं की संख्या गिनती की है। लेकिन उनके द्वारा अभी तक 2000 से अधिक बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया है। पिपरी के निकट ग्राम पोटला, कंडिया,निचला पुरा मैं स्थाई रूप से यह केंद्र संचालित हो रहे हैं। 25 वर्ष पूर्व रविंद्र भारद्वाज ( देवास) के मार्गदर्शन में संस्कृत शिक्षा का यह कार्य लगातार जारी है। संस्था के सहयोगी आचार्य रतन सिंह सेंधव राज नारायण मिश्रा आदि द्वारा यह कार्य किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति और क्षेत्रीय संस्कृति को सीखने का कार्य शैक्षणिक समय के अतिरिक्त करवाया जाता है बच्चे भी बाल शाखा के रूप में आते हैं। और रुचि लेकर परंपरा को सीख रहे हैं। बोल बम कावड़ यात्रा के संरक्षक गिरधर गुप्ता ने बताया कि यहां पर संस्कृत शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चे 30 तक के पहाड़े मौखिक रूप से बोलने के साथ-साथ हिसाब किताब भी अच्छी तरीके से कर लेते हैं। इन बच्चों को भोजन मंत्र गायत्री मंत्र महामृत्युंजय मंत्र अच्छी तरह याद है वही भारतीय सनातन परंपरा के अनुसार वर्ष भर में जो पर्व आते हैं इस विषय में भी इन्हें जानकारी दी जाती है गुरु वंदना के साथ-साथ यह बच्चे प्रतिदिन माता-पिता के चरण स्पर्श भी करते हैं ।आते समय जाते समय आज्ञा लेकर काम करते हैं ऐसी बहुत सारी संस्कृति बातें हैं। जो यह ग्रहण कर चुके हैं। बच्चों को सूर्य नमस्कार और व्यायाम भी सिखाया जाता है। इनकी उम्र 3 वर्ष से 10 वर्ष तक की रहती है। माता-पिता भी इस कार्य में संस्था का प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष सहयोग करते हैं। यह क्षेत्र गरीब किसान वर्ग का होने के साथ-साथ मजदूरी वाला क्षेत्र है ।यहां कोई बड़ा रोजगार नहीं है। लेकिन इन संस्कृति सुधर केदो से अभी तक कई बच्चे बड़े पद पर पहुंच चुके हैं। और वह भी कुछ ना कुछ मदद करने का प्रयास करते हैं। सनातन विचार मंच संस्था से जुड़े लोकेश जैन सुरेंद्र मिश्रा सतीश अग्रवाल महेंद्र नगर के के दूध अशोक खंडेलिया कमल बर्दिया जैसे सनातनी कार्यकर्ता समय-समय पर इन बच्चों के मध्य जाकर उन्हें इतिहास और भारतीय संस्कृति के विषय में जानकारी देने के साथ-साथ उनका हौसला बढ़ाते हैं। बच्चे सिखाने गुरुवो वाले को आचार्य पद से संबोधित करते हैं। प्रति शनिवार और मंगलवार को हनुमान चालीसा दुर्गा चालीसा गायत्री चालीसा आदि का पाठ भी यहां पर होता है।

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