(प्रियंका सिंह) छतरपुर। सागर रोड स्थित भैंसासुर मुक्तिधाम में शव प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। हाल ही में बीमारी से मृत संतोष नामक व्यक्ति का पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार इसी मुक्तिधाम में किया गया। परिवारजन उस समय कानपुर में थे, जिन्हें सूचना दी गई। इस बीच मृतक के मुखबोले भाई ने ही तिलांजलि दी। महज दो घंटे बाद परिजन पहुँचे और अधजली अस्थियाँ लेकर उसी रात गंगा में विसर्जन कर आए।
इस पूरे मामले ने नगर पालिका परिषद की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुक्तिधाम में शवों की देखरेख और रिकॉर्डिंग के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। नगर पालिका के कर्मचारियों से जब इस विषय पर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि उनकी ड्यूटी सिर्फ शवों को श्मशान तक पहुँचाने तक सीमित है। इसके बाद की कोई ज़िम्मेदारी उनकी नहीं है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कोविड काल के बाद से यहाँ किसी भी प्रकार का रजिस्टर तक नहीं है, जिसमें यह दर्ज हो कि किस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया। इस लापरवाही के चलते कोई भी व्यक्ति शव का दाह संस्कार कर सकता है और इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं मिलती। यह स्थिति भविष्य में बड़ी आपराधिक घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका को तत्काल मुक्तिधामों में शवों का रिकॉर्ड रखने और निगरानी की व्यवस्था शुरू करनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे।
