इंदौर:नगन निगम द्वारा आवारा पशुओं को शहर से दूर करने के बाद कई अप्रिय घटनाओं से लोग बच गए हैं. वहीं आवारा पशु पालक की लापरवाही के चलते बायपास पर यात्रियों की जान पर बन आई है. टोल और बायपास मेंटेनेंस कंपनी भी अनजान बन रही है.आवारा पशुओं से जुड़ा मामला इंदौर बायपास का है. एक समय यह था कि जब शहर की सड़कें आवारा पशुओं से पटी रहती थी, वाहन चालक आए दिन दुर्घटना का शिकार होते थे.
कई तो अपनी जान भी गंवा चुके हैं. नगर निगम द्वारा पशु पालकों पर सख्त कार्रवाई करते हुए शहर को आवारा पशु मुक्त बना दिया लेकिन शहर की सीमा से लगा बायपास पिछले कई वर्षों से आवारा पशुओं के कब्जे में जाता जा रहा है. पशु पालक अपने मवेशियों को बायपास मार्ग की ओर छोड़ देते हैं और यहां पशु दर्जनों की तादाद में मुख्य सड़कों पर फैल कर बैठ जाते हैं, जो बड़ी दुर्घटना का अंदेशा बढाती है क्योंकि बायपास पर वाहन की गति अस्सी से कम नहीं होती.
ऐसे में आचानक आवारा पशुओं का सामना होना यानी वाहन अनियंत्रिक होना स्वाभाविक हो सकता है. इन पर अंकुश लगाना टोल कंपनी की जिम्मेदारी होती है लेकिन वहां इससे जानबूझ कर अनजान बने रहते है क्योंकि देखने में आया है कि मांगलियां टोल से मात्र सौ मीटर दूरी पर ही सड़क और ब्रिज पर आवारा पशुओं का डेरा आसानी से देखा जा सकता है.
इनका कहना है
गाय रखना बहुत अच्छी बात है लेकिन उसके लिए उनका सम्मान भी करें. पालक को शेड की व्यवस्था करनी चाहिए. ऐसे में मवेशियों और मानव की सुरक्षा भी होगी. ग्रामीण जागरूकता की जरूरत है.
– परवेज खान
शहर की सीमा वाला बायपास तो अब नेशनल हाई-वे न होते हुए लोकल हो चुका है. कहीं गढ्ढे कहीं ट्रैफिक और मांगलिया तक आवारा मवेशियों से पटा बायपास दुर्घटनाओं का मार्ग बनते जा रहा है.
– मुकेश वर्मा
सड़क मरम्मत, दुर्घटना सुरक्षा, आपात काल सेवा ऐसे कई कार्य जिसको पूरा करना टोल कंपानी की ज़िम्मेदारी होती है. यही कारण है जो हम से टोल लिया जाता है. कंपनी को लापरवाही नहीं करनी चाहए. डॉ अजय धीमान
