
उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को उज्जैन में आयोजित द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि काल की नगरी उज्जैन का सौभाग्य है कि यह विश्व को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आज का समय भारत का है और पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद से देख रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान केवल पर्यटन और संस्कृति से ही नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक विरासत से भी है। कंस की पराजय के बाद भगवान का विराट रूप दुनिया ने देखा, लेकिन उसका बीज उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में पड़ा था। आत्मा के विकास के लिए हिंदुस्तान से बेहतर कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजसत्ताएं सीमित हो सकती हैं, लेकिन भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सीमाएं असीमित हैं। इसी परंपरा के कारण हमारे देवालय केवल पूजा के केंद्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समाजसेवा के भी मॉडल हैं। बाबा महाकाल के महालोक परिसर इसका उदाहरण है, जहां गर्भगृह भगवान का घर है और शेष परिसर भक्तों के लिए समर्पित है।
डॉ. यादव ने कहा कि कई जन्मों के पुण्य से मिला यह मानव शरीर अनंत संभावनाओं से भरा है। हमें इसका सदुपयोग कर समाज और राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन को केवल आनंद तक सीमित न रखकर, तीर्थाटन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने अहिल्या माता का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित सत्ता के बावजूद उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाकर सनातन संस्कृति को अमर धरोहर दी। उन्होंने संकल्प लिया कि प्रदेश पूरे देश के साथ मिलकर इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाएगा।
