महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान के तहत एक ओर रायशुमारी लेकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ जबलपुर सहित महाकौशल क्षेत्र के जिलों में मप्र कांग्रेस कमेटी द्वारा हाल ही में जारी की गई अधिकांशत: अध्यक्षों की नियुक्तियों को रायशुमारी के बिल्कुल विपरीत माना जा रहा है। आलम ये है कि कांग्रेस के स्थानीय नेता, कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाएं आम हैं कि जब सब कुछ चहेतों के हिसाब से ही करना था तो फिर संगठन सृजन अभियान के तहत रायशुमारी का दिखावा क्यों किया…जबलपुर में कांग्रेस के दोबारा नगर अध्यक्ष बनाए गए सौरभ नाटी शर्मा की नियुक्ति के एक दिन बाद ही विरोध के स्वर उठने लगे.. और ये विरोध करने वाले और कोई नहीं बल्कि कांग्रेस के ही नेता रहे.. जिसने साफ किया कि पार्टी के अंदर किस तरह आपसी प्रतिद्वंदता हावी है।
दो नेताओं ने विरोध स्वरूप मुंडन तक करा लिया। ये हाल जबलपुर के अलावा कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी, अनूपपुर, शहडोल में भी देखा जा रहा है जहां नए अध्यक्षों को लेकर कांग्रेस के नेताओं में ही नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया में डिंडोरी में हर दिन कोई ना कोई कांग्रेस नेता का इस्तीफा नजर आ रहा है, ये नेता आरोप लगा रहे हैं कि हालिया नियुक्त ओमकार मरकाम के नाम का जिक्र दूर दूर तक नहीं था फिर उन्हें कैसे अध्यक्ष बना दिया गया..? क्या उन्हें राहुल गांधी के करीबी होने का फायदा मिला..? ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि संगठन सृजन अभियान को ये दिखावे वाली रायशुमारी किस हद तक फायदा या नुकसान पहुंचाएगी। साथ ही ये भी सवाल है कि जब पैराशूट के जरिए मैदान में उतारे गए नवनियुक्त अध्यक्षों को लेकर ही विरोध हो रहा है.
तो नई कार्यकारिणी कैसी होगी और क्या वह सर्वमान्य होगी..? स्मरण रहे कि जब राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरूआत की थी तो सिर्फ एक मकसद था कि कांग्रेस को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए बकायदा मध्यप्रदेश में पार्टी के पर्यवेक्षकों द्वारा रायशुमारी की गई, उसके बाद कांग्रेस के नगर अध्यक्षों की सूची जारी की गई। लेकिन सूची जारी होने के बाद जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है, क्योंकि रायशुमारी को खुद कांग्रेसियों ने दिखावा कहा है। वजह ये कि जब रायशुमारी में किसी अन्य को अध्यक्ष बनाने की सलाह दी गई तो फिर अंत में उस पर मोहर क्यों नहीं लगी।
बहरहाल राजनैतिक गलियारों में इन दिनों कांग्रेसियों पर खुद पार्टी के नेता भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। उधर मप्र कांग्रेस कमेटी ने ये आदेश जारी किया है कि जो संगठन सृजन अभियान को लेकर विरोध सोशल मीडिया पर करेगा उसके खिलाफ पार्टी सख्त एक्शन लेगी। जबलपुर कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने भी विरोध करने वाले नेताओं के खिलाफ नोटिस जारी करने की बात कही और कहा कि ऐसे लोग विध्न संतोषी लोग होते हैं।मगर प्रश्न फिर वही उठ रहा है कि विधानसभा चुनाव के वक़्त भी इसी तरह की बात कहीं गईं थीं, परन्तु चुनाव परिणाम आने के बाद कार्रवाई ढाँक के पात वाली ही रही। कहने का आशय यह है कि धरातल पर पार्टी की रणनीतियां कितनी असरकारक सिद्ध होंगी जब उसके सिपहसालार ही कटघरे में खड़े हों और जनता के बीच जाने वाले कार्य कार्यकर्ताओं का बड़ा अभाव सतत रूप से मौजूद हो।
नए अध्यक्ष क्या बदलेंगे पुराना ढर्रा …
भारतीय जनता पार्टी के महानगर और जिला ग्रामीण अध्यक्ष की नियुक्ति हुए बहुत लंबा समय गुजर गया है लेकिन अभी तक यहां भी कार्यकारिणी घोषित नहीं हो सकी है। अब बागडोर प्रदेश नेतृत्व के हाथ में नजर आ रही है। रायशुमारी एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल प्रायः हर राजनीतिक पार्टी करती है और इसके जरिये अपने फैसले को सर्वमान्यता का चोला ओढ़ा देतीं हैं। भाजपा – कांग्रेस में इसका चलन वर्षों से अनवरत है, लेकिन नतीजे रायशुमारी रिपोर्ट से उलट नजर आते रहे हैं। लिहाजा रायशुमारी एक बार फिर दिखावा साबित न हो जाए, इसका डर जबलपुर भाजपा के उन नेताओं को सता रहा है जो कि जिला कार्यकारिणी में कोई न कोई पद की आस में आंखें बिछाए बैठे हैं। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा कमान संभालने के बाद एक तरफ संगठन के स्थानीय गुटों में चर्चाएं हैं कि भाजपा में अब ऐसा नहीं होगा कि ईमानदारी से काम करने वाले नेता मुंह ताकते रह जाएं और भाजपा के स्थानीय दिग्गज नेता अपने-अपने चहेतों को कार्यकारिणी में जगह दिलवाकर खुश हो जाएं।
वहीं दूसरी ओर कुछ नेताओं के बीच ये भी चर्चाएं हैं कि कोई कितना भी प्रयास कर ले, अंत में भाजपा के बड़े चेहरे अपने-अपने चहेतों को कार्यकारिणी में स्थान दिलाने कामयाब हो जाएंगे और ईमानदार कार्यकर्ता, नेता एक बार फिर से ठगा जाएगा। चर्चाएं ये भी हो रहीं हैं कि नए प्रदेश अध्यक्ष आए हैं तो वे पार्टी के पुराने ढर्रे यानि चहेतों को उपकृत करने की परंपरा को तोड़ेंगे और एक नया प्रयोग पार्टी के हित में करेंगे। खबर है कि जबलपुर पहुंचे भाजपा के दोनों पर्यवेक्षकों ने विधायक, सांसद, निगम, मंडलों के अध्यक्ष व पार्टी के शहर में बड़े चेहरों से मुलाकात कर ली है और उनसे अपने- अपने मत मांगे हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि नवीन कार्यकारिणी में कौन उपकृत होता है। ये अब भाजपा और कांग्रेस दोनों जान चुके हैं कि रायशुमारी पार्टी के लिए धरातल पर कितनी प्रभावशाली है। अब देखना ये है कि भाजपा भी रायशुमारी को सिर्फ दिखावे की तरह इस्तेमाल करती है या फिर नए प्रयोग के साथ नए चेहरों को कार्यकारिणी में जगह देती है।
