व्यावरा/राजगढ:अभी भी बहुप्रतीक्षित का दर्जा रखने वाली भोपाल रामगंजमण्डी रेल्वे लाईन के खिलचीपुर से घाटोली राजस्थान के बीच ट्रायल रन पूरा हुए 6 माह बीत चुके है. लेकिन धूमधाम और गाजे-बाजे से हुए इस ट्रायल के 6 महीने बाद भी नागरिकों को हरी झण्डी का इंतजार है. इस भूभाग पर ट्रेन देखने की लालसा पूरी कब होगी इसका अंतिम रूप से जवाब किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं है. कई बार राजनीति नजर आती है.
अब यात्रियों को इस सुविधा पर कब तक खेद मनाया जाएगा यह देखने वाली बात है. वर्तमान में इस परियोजना में झालावाड जिले के घाटोली स्टेशन तक ट्रेन का नियमित संचालन किया जा रहा है जिसमें मेमू ट्रेन में काफी अच्छा ट्रैफिक रोजाना सफर कर रहा है. घाटोली से आगे खिलचीपुर तक ट्रेन नहीं आने से राजस्थान और मप्र के लोगों को इस मार्ग से यातायात की सुविधा नहीं मिलने में विलंब हो रहा है. लोगों को बसों और अन्य सड़क साधनों से दोगुना किराया लगाकर सफर पूरा करना पड़ता है.
यह परियोजना मार्ग 276 किमी लंबा है और अब तक करीब 3335 करोड़ रूपए से ज्यादा इस पर खर्च हो चुके है. 165 में से 130 किमी का ट्रैक पूर्ण हो चुका है जो कि झालावाड़ से घाटोली होकर खिलचीपुर तक है. लेकिन बावजूद इसके ट्रेन केवल घाटोली तक ही आ रही है. नई ट्रेन के बजाय यदि इन्हीं ट्रेनों को घाटोली से आगे 35 किमी बढ़ा दिया जाए तो परियोजना अपनी सार्थकता की और मप्र में पहला कदम रख देगी हालांकि मेमू ट्रेन को ही आगे बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए स्थानीय प्रतिनिधियों को पहल करनी होगी.
बीते 6 महीने पूर्व यानी 20 फरवरी को पूरे जलसे के साथ लकीपुर स्टेशन पर ट्रायल ट्रेन पहुंची थी. उस समय उम्मीद बंध गई थी कि जल्द यहां नियमित ट्रेन भी दौड़ेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.6 महीने पूर्व ट्रायल के बाद से यहां नियमित ट्रेन का इंतजार है.अब 6 महीने बाद भी घाटोली से आगे नयापुरा, देहरी, भोजपुर के रास्ते ट्रेन का सिर्फ इंतजार हो रहा है. वहीं दूसरी ओर इस प्रोजेक्ट पर राजगढ़ से ब्यावरा और भोपाल की तरफ काम अधूरा पड़ा है. घाटोली से महज 35-40किमी दूर खिलचीपुर तक ही ट्रेन चलाने के प्रयास हो तो जिला सीधे तौर पर राजस्थान से जुड़ जाएगा, अब ये प्रयास कब होने यह भी देखने वाली बात होगी. करीब 3 दशक इस प्रोजेक्ट को पूर्ण हो चुके है.
40 किमी तक आने में और कितना समय
बीते 20 फरवरी 2025 को मुम्बई के रेल संरक्षा आयुक्त सीआरएस की ओर से खिलवीपुर तक के ट्रैक का परीक्षण किया जा चुका है. उसी दौरान ट्रायल के बाद उम्मीद जागी थी कि जल्द यहां ट्रेन की सीटी नियमित रूप से सुनाई देगी लेकिन गाजे-बाजे के साथ हुए ट्रायल में यह प्रतीक्षित आवाज गुम हो गई हालाकि सब कुछ ठीक धार जाने के बाद सीआरएस की ओर से रेल्वे बोर्ड को ट्रैन संचालन के लिए प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है. खिलवीपुर तक ट्रेन संचालन की अंतिम स्वीकृति के बाद ही 4 नए स्टेशन नयागांव राजस्थान सीमा और देहटी, भोजपुर और खिलचीपुर तक इसका लाभ मिल सकता है अथ इस 40 किमी के हिस्से तक ट्रेन बढ़ाने के लिए प्रयासों को यदि बल दिया जाए तो ट्रेन थोडी मप्र की तरफ भी आ जाएगी.
इनका कहना है
हमारी कोशिश और प्रक्रिया जारी है, जल्द ट्रेन चलेगी
कुछ औपचारिकताए 6 अभी बाकी है ट्रायल सफल रहा है और इसके बाद रेल्वे बोर्ड ही यह तय करता है कि कितनी, कब और कहां तक ट्रेन चले हमारी कोशिश जारी है कि जल्द प्रोजेक्ट भोपाल तक पूरा हो और अपने क्षेत्र में रेल का नियमित संचालन हो सके
रोडमल नागर, सांसद राजगढ़
अनुमति के बाद होगा ट्रेन का नियमित संचालन
6 जैसा कि ट्रायल पूर्ण हो चुका है और वह सफल रहा है, लेकिन रेल्वे बोर्ड की और से अनुमति मिलने के बाद ही नियमित रूप से इस खण्ड में ट्रेन का संचालन होगा. यह पूरा मामला फिलहाल प्रक्रिया अधीन है.
सौरभ जैन, सीनियर डीसीएन, रेल्वे मण्डल कोटा, पश्चिम मध्य रेल्वे
