नगर कार्यकारिणी को लेकर भाजपा में घमासान, विधायक गौड़ नाराज, पर्यवेक्षक पहुंचे मिलने

इंदौर: भाजपा में नगर कार्यकारिणी को लेकर घमासान मच गया है. नगर अध्यक्ष ने पर्यवेक्षकों के साथ बैठकर सूची भोपाल प्रदेश अध्यक्ष को भेज दी थी. इस बीच एक विधायक ने आपत्ति लेकर नाराजगी जाहिर कर दी. इसके बाद पर्यवेक्षकों को दोबारा भेजा और उनके नाम लिए गए.नगर कार्यकारिणी के नामों को लेकर सुमित मिश्रा फंस गए है. मिश्रा ने भोपाल से भेजे गए पर्यवेक्षक विवेक जोशी और आशुतोष तिवारी के साथ बैठक कर नाम फाइनल कर सूची अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेज दी थी.

बताया जा रहा है कि विधायक मालिनी गौड़ ने अपने नाम को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई और नाम नहीं दिए. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों पर्यवेक्षक को दोबारा भेजा. दोनों पर्यवेक्षक ने गौड़ के घर जाकर नाम लिए और भोपाल सौंप दिए. कहा जा रहा है कि क्षेत्र क्रमांक चार में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने अपने समर्थकों क्रमशः भारत पारिख, विशाल गिदवानी, सुधीर देडगे, प्रकाश परवानी के नाम दिए है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण पद महामंत्री का है, जिस पर गौड़ वीरेंद्र शेंडके को बनाना चाहती है. दूसरा यह है कि एक, दो और तीन के विधायक एवं महापौर के साथ नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के संबंध बेहद करीबी है. मिश्रा, विजयवर्गीय, मेंदोला, गोलू और पुष्यमित्र के नामों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप सकते है.
चार नंबर में बढ़ रहा हस्तक्षेप
इससे भी बढ़कर सभी नेताओं शंकर, सुमित्रा महाजन के साथ पुष्यमित्र का हस्तक्षेप चार नंबर विधानसभा हो रहा है. इसमें भी पुष्यमित्र भार्गव की लोकप्रियता और प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अंदर ही अंदर विधायक गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ की लगातार भोपाल और संगठन स्तर पर शिकायत की जा रही है. इससे मालिनी विचलित होकर नाराजगी जाहिर कर रही है. गौड़ को लग रहा है कि उनके समर्थकों को नगर कार्यकारिणी में उचित स्थान नहीं मिलेगा. इसलिए ही उन्होंने नाम देने से इंकार किया और फिर पर्यवेक्षकों को अपने नाम पद सहित देने के मांग की है.

विजयवर्गीय बनाना चाहते हैं केसरी को
कहा जा रहा है कि मंत्री विजयवर्गीय अनुसूचित जाति से भूपेंद्र केसरी को महामंत्री पद देना चाहते है और केसरी एक नंबर में विजयवर्गीय के चुनाव में बहुत सक्रिय रहे थे. केसरी के अलावा मेंदोला अपने समर्थक सुधीर कोल्हे, शिवम वर्मा को गोलू का समर्थन है. वहीं एक नाम हरप्रीत सिंह बक्षी का है, जो कैलाश और मेंदोला ने रखा है. खैर, कार्यकारिणी घोषित होगी तो मालूम पड़ हो जाएगा कि किसको कितनी तवज्जों और महत्व मिला. कौन विधायक का वर्चस्व बना और कमजोर हुआ. एक बात तय है कि गौड़ को पद नहीं मिले तो चार नंबर भी उनके खाते में से जाने के संभावना बढ़ जाएगी. नया चेहरा बीजेपी लाने में डरेगी नहीं

Next Post

लावारिस शवों को मिली सम्मानजनक विदाई

Wed Aug 20 , 2025
इंदौर:शहर में लावारिस और असहाय शवों को अंतिम सम्मान दिलाने के लिए हाल ही में शुरू की गई ‘मानव सेवा वाहन’ सेवा से नई मिसाल पेश की है. मात्र एक माह में इस विशेष वाहन ने 20 से अधिक अज्ञात और क्षत-विक्षिप्त शवों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया.कई शव सड़क […]

You May Like