श्रीनगर, 19 अगस्त (वार्ता) जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना के बाद जीवित बचे लोगों के मिलने की लगातार कम होती संभावना के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि लापता लोगों के शवों को निकालना प्राथमिकता है ताकि उनके परिवार उनका अंतिम संस्कार कर सकें।
श्री अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, “लगभग 70 लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना कम होती जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में हमारा प्रयास अधिक से अधिक शवों को निकालकर उनके परिवारों को सौंपना होगा।” उन्होंने कहा कि किश्तवाड़ में आपदा हिमनद झील के फटने से नहीं, बल्कि बादल फटने से हुई थी। उन्होंने कहा, “सबसे ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों की पहचान के लिए विशेषज्ञों की टीम नियुक्त करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को कम किया जा सके। हमने कुछ महीने पहले रामबन में भी ऐसी ही तबाही देखी थी। ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए ताकि अगर ऐसी आपदाएं आ भी जाएं, तो नुकसान कम से कम हो।”
एनसीईआरटी की ओर से विभाजन पर विशेष मॉड्यूल जारी करने पर (जिसमें देश के विभाजन के लिए मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को दोषी ठहराया गया है) मुख्यमंत्री ने “इतिहास का राजनीतिकरण” करने के कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इतिहास के साथ खिलवाड़ करना, खासकर जब राजनेता ऐसा करते हैं, गलत है। सरकारें आती-जाती रहती हैं। आज भाजपा सत्ता में है, कल कोई और होगा। कोई और सरकार होगी। वे आरएसएस के खिलाफ अध्याय लिखना शुरू कर देंगे। फिर आप क्या करेंगे? फिर सरकार बदल जाएगी। वह अध्याय सामने आएगा। दूसरा अध्याय आएगा। इसलिए जहां तक हो सके, इन चीजों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। बच्चों को हमारा इतिहास सीखने दें। उसके बाद बच्चों को खुद फैसला करना चाहिए। जो सही है, वह सही है।”
