नई दिल्ली, 18 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि संपत्ति का खुलासा न करने से हर मामले में चुनाव परिणाम रद्द नहीं हो सकते हैं।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि किसी विजयी उम्मीदवार ने संपत्ति से संबंधित जानकारी का खुलासा नहीं किया है, अदालतों को अत्यधिक पांडित्यपूर्ण और निंदनीय दृष्टिकोण अपनाकर चुनाव को अमान्य करने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि यह पता लगाना होगा कि क्या इस तरह से छुपाना या खुलासा न करना इतना बड़ा और व्यापक था कि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता था।
पीठ ने कहा, “हमारी राय में असली परीक्षा यह होगी कि किसी भी मामले में संपत्ति के बारे में जानकारी का खुलासा न करना परिणामी या अप्रासंगिक है, जिसका निष्कर्ष चुनाव को वैध या अमान्य घोषित करने का आधार होगा, जैसा भी मामला हो।”
पीठ ने 14 अगस्त, 2025 के अपने फैसले में कहा, “चुनावी प्रक्रिया में आपराधिक पृष्ठभूमि का खुलासा चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व है, जिसका पूरी ईमानदारी से पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, संपत्ति और शैक्षिक योग्यता का खुलासा चुनावी प्रक्रिया को मज़बूत बनाने के लिए अतिरिक्त आवश्यकताओं के रूप में माना जाता है, जिस पर विचार करने की कुछ गुंजाइश होगी कि यह महत्वपूर्ण है या महत्वहीन।”
शीर्ष अदालत ने 3 दिसंबर, 2023 को हुए तेलंगाना विधानसभा चुनावों में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) उम्मीदवार कोवा लक्ष्मी के निर्वाचन के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार अजमेरा श्याम द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि विजयी उम्मीदवार द्वारा फॉर्म 26 हलफनामे में पिछले पाँच वित्तीय वर्षों में से चार वित्तीय वर्षों के आयकर रिटर्न का खुलासा न करना कोई महत्वपूर्ण दोष नहीं था।
