नागपुर, 17 अगस्त (वार्ता) महाराष्ट्र में नागपुर की एक अदालत ने प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से संबंध रखने और 2006 में गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले में आठ लोगों को पर्याप्त सबूतों एवं गवाहों के बयान के अभाव में बरी कर दिया है।
इन लोगों के खिलाफ एक गैरकानूनी संगठन (धारा 10) के सदस्य होने और गैरकानूनी गतिविधियों (धारा 13) के तहत अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामला लंबित रहने तक ये लोग जमानत पर थे।
अदालत ने जिन लोगों को सभी आरोपों से बरी किया गया उनमें शकील वारसी, शाकिर अहमद नासिर अहमद, मोहम्मद रेहान अतुल्लाखान, जियाउर्रहमान महबूब खान, वकार बेग यूसुफ बेग, इम्तियाज अहमद निसार अहमद, मोहम्मद अबरार आरिफ मोहम्मद काशिम और शेख अहमद शेख है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ए.के. बांकर द्वारा 13 अगस्त को पारित यह आदेश शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि आरोपी सिमी की गतिविधियों में शामिल थे और उनके पास गोपनीय दस्तावेज थे। हालाँकि, अदालत को इन दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला।
न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी गवाह ने आरोपियों के सिमी की गतिविधियों में शामिल होने की गवाही नहीं दी। किसी भी सबूत से यह पता नहीं चला कि वे बैठकों में शामिल थे, प्रचार कर रहे थे या समूह को वित्तीय सहायता दे रहे थे।
न्यायाधीश ने कहा ”सक्रिय इरादे या भागीदारी के सबूत के बिना केवल गैरकानूनी संगठन से जुड़े साहित्य या दस्तावेजों को रखना कानून में निर्धारित सीमा को पूरा नहीं करता।”
