नयी दिल्ली, 11 अगस्त (वार्ता) धान, दलहनी फसलों और मक्का की रोपाई-बिजाई में कुल मिला कर पिछले वर्ष की तुलना में तेजी के साथ चालू खरीफ सत्र 2025-26 में बुआई का रकबा कुल मिला कर 995.63 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। पिछले साल इस समय तक खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 957.15 लाख हेक्टेयर था।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार तिलहनों और कपास की बुवाई पिछले पीछे चल रही है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार धान की बुआई का क्षेत्र इस साल 364.80 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है, जो पिछल साल के इसी समय के 325.36 लाख हेक्टेयर से 39.45 लाख हेक्टेयर अधिक है।
दलहनों का रकबा पिछले साल के 106.52 लाख हेक्टेयर की तुलना मे 106.68 लाख हेक्टेयर के स्तर पर पहुंच गया है।
तुअर का रकबा 40.86 लाख हेक्टेयर पिछले साल से 2.02 लाख हेक्टेयर कम चल रहा है। पिछले साल इस समय तक तुअर की बुवाई 42.87 लाख हेक्टेयर थी। कुलथी (0.17), उड़द (20.15) , मूंग (33.21) और अन्य दलहनों (3.24) लाख हेक्टेयर पर पिछले साल से अधिक है। मोठ की बुवाई 9.06 लाख हेक्टेयर पर पिछले साल से 1.02 लाख हेक्टेयर अधिक चल रही है।
कुल मोटे अनाजों का रकबा 178.73 लाख हेक्टेयर पर 7.77 लाख हेक्टेयर अधिक है। मक्के की बुआई का क्षेत्र 91.89 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी समय से 8.74 लाख हेक्टेयर अधिक है। ज्वार (13.69) और बाजरा का रकबा (64.86) लाख हेक्टेयर रकबे के साथ पिछले साल से कुछ कम है। रागी की बुवाई 4.41 लाख हेक्टेयर के साथ तेज है। पिछले साल इस समय तक रागी का रकबा 4.15 लाख हेक्टेयर था। अन्य मिलेट का रकबा भी 3.88 लाख हेक्टेयर के साथ करीब करीब पिछले साल के स्तर पर चल रहा है।
तिलनों की बुवाई कम है 175.61 लाख हेक्टेयर पर पहुंची है जो एक साल पहले इसी अवधि से 6.82 लाख हेक्टेयर कम है। मूंगफली का रकबा 43.23 लाख हेक्टेयर पर एक साल पहले से 1.84 लाख हेक्टेयर कम चल रहा है। सोयाबीन का रकबा 119.51 लाख हेक्टेयर पर 4.73 लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है। असली, सूरजुखी, रामतिल और अन्य तिलहनों का रकबा भी कम है।
कपास का रकबा 106.96 लाख हेक्टेयर पर 3.53 लाख हेक्टेयर कम चल रहा है। जूट और मेस्ता का रकबा भी 5.54 लाख हेक्टेयर के स्तर पर है, जो एक साल पहले से 18 हजार हेक्टेयर कम है।
