रिश्तेदारी में आए युवक की गोली मारकर हत्या

दमोह.जिले के देहात थाना क्षेत्र अंतर्गत जबलपुर नाका चौकी के समीप ग्राम बालाकोट जंगल में तत्कालीन वजह से एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने का सनसनी खेज घटनाक्रम सामने आए हैं. घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर सीएसपी एचआर पांडे, चौकी प्रभारी प्रशीता कुर्मी, प्र.आ.आलोक, प्रेमदास,आ.देवेंद्र, अजय, रुपेश, सहित पुलिस ने पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू कर दी थी और शव को सुरक्षित जिला अस्पताल के शव ग्रह में रखवा दिया गया था. चौकी प्रभारी प्रशीता कुर्मी ने बताया कि शनिवार रात करीब 9 बजे यह घटना की सूचना मिली थी, जहां तत्काल पहुंचकर शव को सुरक्षित जिला अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया गया था और अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी थी. प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया कि मृतक गुड्डू पिता भूरे सिंह गौड़ उम्र करीब 30 वर्ष निवासी महुआ सेमरा थाना रहली अपने साथियों के साथ महेंद्र के रिश्तेदार के यहां ग्राम बालाकोट आया था, तभी तत्कालीन विवाद हो गया. जिससे आरोपित भुरई उर्फ भूरे लोधी निवासी बालाकोट जो कि 302 के मामले में 20 साल की सजा काटने के उपरांत वापस आकर पुनः यह घटना को अंजाम दिया है.घटना की बारीकी से जांच पड़ताल पुलिस द्वारा की जा रही है, मौके पर एडिशनल एसपी सुजीत सिंह भदोरिया भी चौकी जबलपुर नाका और जिला अस्पताल चौकी पहुंचे थे, जहां वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों से घटना के संबंध में जानकारी ली थी.इधर जिला अस्पताल में सब इंस्पेक्टर एम एस कोरकू, एएसआई अकरम खान, वैज्ञानिक अधिकारी दीपक ठाकुर और शेखर की मौजूदगी में शव का पंचनामा भरकर एक्सरा के लिए शव को भेजा गया. जहां एक्सरा उपरांत पैनल डॉक्टर टीम से पोस्टमार्टम हुआ. इसके उपरांत मर्ग और अपराध कायम कर जांच पड़ताल बारीकी से कर दी गई है.सीएसपी एचआर पांडे का कहना है कि यह दो बाइकों पर चार-पांच लड़के ग्राम बालाकोट जंगल पहुंचे थे, जहां तत्कालीन विवाद होने से विवाद इतना बड़ा की 12 बोर की बंदूक से गोली चल गई. जिससे युवक के सिर,हाथ, कमर और भी जगह कारतूस के छर्रे लगने से मौत हो गई.फिर हाल पुलिस ने आरोपी भुरई को गिरफ्तार कर लिया है.

Next Post

शिक्षा और स्वास्थ्य में सेवा भाव की पुनः आवश्यकता

Sun Aug 10 , 2025
इंदौर। सर संघ चालक मोहन राव भागवत ने आज कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र, जो पहले सेवा के प्रतीक थे, आज व्यवसाय का रूप ले चुके हैं। पहले शिक्षक छात्र की देखभाल को जिम्मेदारी मानते थे और वैद्य बिना बुलाए रोगी की मदद के लिए पहुँच जाते थे। […]

You May Like