
रायसेन।रायसेन में रविवार को भुजरियों(कजलियों) का परंपरागत चल समारोह शहर में तीन जगहों से ढोल-नगाड़ों के साथ निकाला गया। शहर के नरापुरा, शिकारीपुरा सहित पाटनदेव क्षेत्र से गाजे-बाजे के बीच निकाले गए।इस बार अथाईं मोहल्ले में कुशवाहा समाज के युवक भैय्या लाल कुशवाहा का हार्ट अटैक से निधन हो जाने से लहंगी का आयोजन नहीं हुआ।
लोकनृत्य लहंगी व राई के बीच सावन गीतों पर युवाओं की टोलियां मंजीरों व ढोलक के बीच सुर ताल के साथ कदमताल मिलाते हुए जमकर झूमीं। वहीं महिलाएं सिर पर भुजरियों की डलियां रखकर इस जुलूस में शामिल हुईं।इसके बाद इन भुजरियों को श्रद्धापूर्वक प्राचीन मिश्र तालाब, भुजरिया तालाब, कुम्हरिया तालाब में विसर्जन किया। इसके बाद शहर में जगह जगह भुजरिया मिलन के कार्यक्रम हुए।जिसमें लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर भुजरियों का आदान प्रदान कर गिले शिकवे दूर किए। भाइचारा बनाए रखने की दुआ मांगी। छोटों ने बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
किन्नर समाज ने भी नहीं निकाला भुजरियों का जूलूस….
रायसेन शहर में राखी पर्व के दूसरे दिन किन्नर समाज द्वारा परंपरागत नाचते गाते हुए के पाटनदेव हनुमान मंदिर से भुजरियों का जुलूस किन्नर नायक तमन्ना गुरु के नेतृत्व में निकाला जाता था। लेकिन किन्नर समाज में अनरय की वजह से रविवार भुजरियों का परंपरागत जूलूस बाजेगाजों के बीच नहीं निकाला गया। औपचारिकता निभाते हुए वार्ड 17 से भुजरियां विसर्जन के लिए सिर पर कजलियों डलिया रखे लोगों की मंगलकामना के गीत गाते हुए बुजुर्ग, युवा किन्नर शामिल हुए।
भुजरियों की टोकनी रखकर महिलाओं द्वारा लगाए फेरे…. गाए मंगल गीत
रविवार को भुजरियों का परंपरागत जुलूस श्याम 4 बजे निकाल गया। इंडियन चौराहे के समीप महिलाओं ने भुजरियों की टोकनी रखकर फेरे लगाएं और सावन के मंगल गीत जाए यह क्रम जगह हुआ। भुजरियों का यह जुलूस प्रमुख मार्गों से होते हुए मिश्र तालाब पहुंचा। जहां महिलाओं ने भुजरियों का श्रद्धापूर्वक विसर्जन मिश्र तालाब के पानी में किया। इसके बाद शाम को जगह-जगह गुजरिया मिलन के कार्यक्रम हुए। लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर सुख दुख में साथ निभाने का वचन दिया । छोटू ने बड़ों को भुजरियों का आदान-प्रदान कर चरण छूकर आशीर्वाद लिया। वहीं बड़ों ने छोटों को आशीर्वाद दिया।
