विधानसभा ने पारदर्शिता, जवाबदेही और ऐतिहासिक सच्चाई को कायम रखा : विजेंद्र

नयी दिल्ली, 09 अगस्त (वार्ता) दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को कहा कि तीसरे सत्र ने न केवल महत्त्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और ऐतिहासिक सत्यनिष्ठा के मूल्यों को भी कायम रखा।
श्री गुप्ता ने विधानसभा सत्र समापन के बाद बताया कि आठवीं विधानसभा का तीसरा सत्र चार अगस्त से प्रारंभ होकर आठ अगस्त को पांच बैठकों के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया गया। इस दौरान कुल 19 घंटे 40 मिनट की अवधि में विधायी, वित्तीय और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर व्यापक एवं सार्थक चर्चाएँ हुईं।
उन्होंने बताया कि नियम 280 के अंतर्गत कुल 171 विशेष उल्लेख सूचनाएँ प्राप्त हुईं, जिनमें से 62 विषय सदन में उठाए गए। ये विषय दिल्ली के नागरिक, प्रशासनिक और नीतिगत मसलों से संबंधित थे जिन्हें संबंधित विभागों को भेजकर 30 दिनों के भीतर उत्तर देने के निर्देश दिए गए हैं।
अध्यक्ष ने बताया कि इस सत्र में तीन महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित किए जिनमे दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025, दिल्ली माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 और दिल्ली माल एवं सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं। सभी विधेयक ध्वनिमत से पारित हुए।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि नियम 114 के तहत सदन ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के लिए और 28 जुलाई को ‘निसार’ उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए बधाई प्रस्ताव पारित किया। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, सशस्त्र बलों, सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ की सफलता पर बधाई दी गई। इन विषयों पर 20 सदस्यों ने चर्चा की।
उन्होंने कहा कि 2022 में उद्घाटित तथाकथित ‘फाँसी घर’ के विषय में सदन को अवगत कराया गया। इसके निर्माण पर 1,04,49,279 रुपये खर्च हुए, जिससे विधानसभा की धरोहर इमारत को क्षति पहुँची और जनता को गुमराह किया गया। विपक्ष इस विषय में कोई ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। अध्यक्ष ने याद दिलाया कि इस भवन का गौरवशाली इतिहास महात्मा गांधी के तीन आगमन, रॉलेट एक्ट पारित होने के समय उनकी उपस्थिति तथा विट्ठलभाई पटेल, पंडित मदन मोहन मालवीय, गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे महान नेताओं के योगदान से जुड़ा है।
श्री गुप्ता ने कहा कि तीसरे सत्र ने न केवल महत्त्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और ऐतिहासिक सत्यनिष्ठा के मूल्यों को भी कायम रखा। उन्होंने कहा कि गंभीर बहस, जन मुद्दों की गहन समीक्षा और महत्त्वपूर्ण कानून पारित कर, सदन ने एक बार फिर दिल्ली की जनता और संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण दिया है।

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