भोपाल। चंद्रप्रभु मंदिर में 32वें वर्षायोग के दौरान गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी ने धर्मसभा में संगति का महत्व बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अंजन चोर ने सज्जन सेठ की संगति से विद्या सीखी, वैसे ही संतों की संगति से चोर भी संत बन जाते हैं। खड़क सिंह डाकू और बाबा भारती की कथा के माध्यम से विश्वास न तोड़ने की सीख दी। माताजी की प्रेरणा से सैकड़ों भक्त प्रतिदिन मंत्र जाप कर रहे हैं।
संत संगति का यही महत्व, चोर भी बनते हैं संत
