जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं में कनिष्ठ संविदा विक्रेता के पद के लिए नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार कर नियुक्ति देने के निर्देश दिए। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने विभाग को कहा कि हाईकोर्ट द्वारा राकेश यादव के प्रकरण में दिए गए दिशा निर्देशों के अनुरूप कंप्यूटर विषय में डिप्लोमा व डिग्री के बोनस अंक प्रदान करें और उसके बाद मेरिट लिस्ट तैयार करें।
एकलपीठ ने मामले में स्पष्ट किया है यह कार्रवाई केवल याचिकाकर्ता व निजी अनावेदकों के संबंध में करनी होगी। यह आदेश उन पर प्रभावित नहीं होगा जिनकी नियुक्ति को चुनौती नहीं दी गई है।सिवनी निवासी अवधेश गिरी की ओर से अधिवक्ता वराव जुमड़े ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बोनस अंक की अहर्ता में गड़बड़ी की गई है।
अनावेदकों शिशुपाल वर्मा, विशाल डेहरिया और संजय दुबे को डिप्लोमा के 15 और डिग्री के 25 बोनस अंक प्रदान किए गए हैं। दलील दी गई कि याचिकाकर्ता को केवल डिप्लोमा के 15 अंक दिए गए हैं। याचिकाकर्ता और अनावेदकों की डिग्री में कंप्यूटर केवल आधार पाठ्यक्रम का एक विषय था, ऐसे में अनावेदकों को गलत अंक प्रदान किए गए हैं। सुनवाई के बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।
