नयी दिल्ली, (वार्ता) भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष सी.एस. सेट्टी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दरों को स्थिर रखने के फैसले को ‘अपेक्षित’ बताते हुये जमा खाता और बैंक लॉकर के ग्राहकों की मृत्यु की स्थिति में नॉमिनी के दावा निपटान की प्रक्रिया के मानकीकरण के स्वागत योग्य कदम बताया है।
आरबीआई ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन चली बैठक के बाद रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखने की घोषणा की। साथ ही उसने कहा है कि जमा खातों और बैंक लॉकर के ग्राहकों की मृत्यु की स्थिति में परिवार के सदस्यों/नॉमिनी के दावे के निपटान के लिए हर बैंक में अलग-अलग प्रक्रिया है। केंद्रीय बैंक इन प्रक्रियों और जरूरी दस्तावेजों की सूची में एकरूपता लाने के लिए जल्द ही मानक नियमों का प्रारूप जारी करेगा।
श्री सेट्टी ने आरबीआई के फैसलों पर कहा कि ब्याज दरों को यथावत रखने का एमपीसी का निर्णय अधिकांशतः ‘अपेक्षित आधार पर’ था, जो नीतिगत, व्यापार संबंधी धीमी प्रतिक्रिया और कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति के निम्नतम स्तर से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच निहित था। वित्त वर्ष 2025-26 में मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत पर नियंत्रण में रहने की संभावना है, और बाहरी मांग तथा आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बावजूद विकास की गति बरकरार रहने की उम्मीद है।
एसबीआई अध्यक्ष ने कहा कि नियामक और विकास नीति के संदर्भ में मृतक ग्राहकों के मामले में दावों के निपटान के लिए दस्तावेजीकरण के मानकीकरण पर प्रस्तावित दिशा-निर्देश एक स्वागत योग्य कदम है।
